Wed. Dec 11th, 2019

विधान सभा चुनाव दूसरा चरण : कोल्हान की 13 सीटों समेत 20 सीटों पर घमसान शुरू – भाजपा-झामुमो के बीच रस्साकशी

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राणा गौतम

रांची : प्रथम चरण के तहत पलामू प्रममंडल की नौ और लोहरदगा और गुमला जिलों की तीन, कुल मिलाकर 13 सीटों पर मतदान सम्पन्न होने के साथ ही अब सभी की नजरें कोल्हान की ओर चली गयी है। कोल्हान की 13 सीटें के अलावा सात सीटें, कुल 20 सीटों पर दूसरे चरण में सात दिसंबर को चुनाव होने जा रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि कोल्हान इलाके में भाजपा-झामुमो का टसल चुनावी नतीजे के आने वाले संभावित तस्वीर को साफ करेगा।

कोल्हान की 13 सीटों में से आठ पर झामुमो और पांच पर भाजपा का कब्जा है। अमूमन कोल्हान और संतालपरगना के इलाके को झामुमो का गढ़ माना जाता रहा है। मगर, पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने झामुमो के इन दोनों गढ़ों को दरकाने में कुछ हद तक सफलता हासिल की थी। हालांकि यह कहा जाता है कि विधानसभा के चुनाव स्थानीय मुद्दों के आधार पर लड़े जाते रहे हैं।

इन सीटों पर होंगे चुनाव

दूसरे चरण में बहरागोड़ा, घाटशिला, पोटका, जुगसलाई, जमशेदपुर पूर्वी, जमशेदपुर पश्चिमी, सरायकेला, खरसावां, चाइबासा, मझगांव, जगन्नाथपुर, मनोहरपुर, चक्रधरपुर, तमाड़, मांडर, तोरपा, खूंटी, सिसई, सिमडेगा और कोलेबिरा में चुनाव होंगे।

गढ़ भेदने-गढ़ बचाने की चुनौती

कोल्हान की सीटों के अलावा 2014 के चुनाव में तमाड़ से आजसू, मांडर, खूंटी, सिसई और सिमडेगा से भाजपा, तोरपा से झामुमो और कोलेबिरा से झापा के एनोस एक्का ने चुनाव जीता था। वैसे, एनोस एक्का की सदस्यता खत्म होने के बाद कोलेबिरा में उपचुनाव हुए थे। उपचुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि यदि झामुमो कोल्हान के अपने गढ़ को इस बार बचा पाने में कामयाब होता है तो यह भाजपा के लिए बड़े झटके के समान होगा।

मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत भाजपा के तमाम नेता लोकसभा चुनाव के बाद से ही इस इलाके को फोकस किये हुए थे। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी एक दिसंबर को कोल्हान इलाके में पहुंचकर पार्टी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार करेंगे। जहां तक कोल्हान छोड़ दूसरी सीटों की बात है, निश्चित तौर पर अभी तक इन सीटों पर भाजपा हावी रही है।

वैसे, इस बार कोल्हान समेत इन सीटों के समीकरण बदले-बदले नजर आ रहे हैं। कोल्हान में सभी पार्टियों में टिकट के सवाल पर बगावत हुई। चेहरे दल-बदल कर दूसरे फोल्डर से चुनावी दंगल में हैं। भाजपा यदि कोल्हान की सीटों में झामुमो को पटखनिया देने में सफल होती है तो यह भाजपा के लिए बड़े बोनस के समान होगा।

दल बदलकर पुराने चेहरे आपस में कर रहे जोर-अजमाइश

बहरागोड़ा में झामुमो के कुणाल षाड़ंगी इस बार भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, भाजपा नेता समीर महंती झामुमो का झंडा उठाये हुए हैं। जुगसलाई की सीट पिछली बार भाजपा ने आजसू के खाते में दी थी। इस बार परिस्थितियां बदल चुकी है। आजसू के कोटे से मंत्री रह चुके रामचंद्र सहिस से भाजपा के प्रत्याशी मोचीराम बाऊरी दो-दो हाथ कर रहे हैं।

झामुमो विधााक शशिभूषण सामद ने पार्टी से बगावत कर ली है। वह बाबूलाल के साथ चुनाव के मैदान में हैं। तमाड़ में आजसू की टिकट पर चुनाव जीते विकास कुमार मुंडा इस बार तीर-धनुष उठाये हुए हैं। आजसू और भाजपा के प्रत्याशी भी यहां चुनावी रण में हैं। मुख्यमंत्री रघुवर दास की सीट जमशेदपुर पूर्वी तो इस बार पूरे देश में चर्चा के केंद्र में हैं।

सीएम के कैबिनेट सहयोगी सरयू राय बतौर निर्दलीय रघुवर को चुनौती दे रहे हैं। मौके को ताड़ते हुए झामुमो समेत कई विपक्षी दलों ने सरयू राय को समर्थन देने की घोषणा की है। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी गौरव बल्लभ चुनावी मैदान में हैं। चक्रधरपुर से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा के लिए आजसू प्रत्याशी रामलाल मुंडा परेशानी का कारण बन सकते हैं।

तोरपा विधायक पौलूस सुरीन ने टिकट नहीं मिलने के बाद झामुमो से बगावत कर लिया है। वह बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा के पुराने दिग्गज कोचे मुंडा और झामुमो के नये चेहरे सुदीप गुड़िया भी दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं। सिमडेगा में भाजपा ने दो बार विधायक रही विमला प्रधान के बदले नये चेहरे पर भरोसा जताया है। मांडर में कांग्रेस के एक समय विधायक रहे देवकुमार धान को भाजपा ने इस बार चुनावी समर में उतारा है।

वहीं, दो बार विधायक रह चुके बंधु तिर्की झाविमो की टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं। गठबंधन में कांग्रेस ने नये चेहरे शनि उरांव पर भरोसा जताया है। यानी कहा जा सकता है कि राजनीतिक उथलपुथल और जमकर हुए दल-बदल के बाद उम्मीदवारों और उनकी पार्टियों के बीच न तो दलीय निष्ठा दिखायी पड़ रही है और न ही बेहतर संवाद। सभी राजनीतिक दलों के समक्ष यह स्थिति है।

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