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वट सावित्री पूजा आज, महिलाओं ने किया बरगद पेड़ की पूजा, जानें पूजा की प्रासंगिकता

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03 जून, 2019 

रांची : ज्येष्ठी अमावस्या सोमवार को सोमवती अमावस्या के साथ वट सावित्री व्रत भी है। अखंड सौभाग्य का प्रतीक वट सावित्री पूजा सोमवार को मनाया गया। इस दिन सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके बरगद के पेड़ चारों फेरें लगाकर अपने पति के दीघार्यु होने की प्रार्थना करती हैं।

वट सावित्री व्रत सौभाग्य देने वाला और संतान की प्राप्ति में सहायता देने वाला व्रत माना गया है। भारतीय संस्कृति में यह व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। सुबह महिलाएं स्नान करने के बाद बरगद पेड़ में मौली सूता लपेटकर व कथा सुनकर अपने पति को पंखा से हवा कर उनकी लंबी उम्र की कामना करेंगी। राजधानी रांची के विभिन्न इलाकों में महिलाएं वट पेड़ के नीचे जमा होंगी और सामूहिक रूप से पूजा अर्चना करेंगी।

वट सावित्री पूजन हेतु शुभ मुहूर्त सुबह 05:02 बजे से 06:41 बजे तक, सुबह 09:01 बजे से दिवा 10:02 बजे तक, सुबह 11:18 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक एवं दोपहर 01:24 बजे से दोपहर 02:50 बजे तक है। वट सावित्री पूजा को को लेकर पूजा दुकानें ग्राहकों की भीड़ रही। दुकानोें पर महिलाएं पूजन सामाग्री की खरीदारी करने के साथ पंखा, मौली सूता, सुराही आदि की खरीदारी की। वट सावित्री पर्व को लेकर कई लोगोें की ओर से सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने के लिए पुजारियों की अग्रिम बुकिंग की गयी है।

वट सावित्री पूजा की प्रासंगिकता
भारतीय संस्कृति में वट सावित्री पूजन का काफी महत्व है। भारतीय नारी की इच्छा शक्ति, समर्पण, सेवा के साथ पतिव्रत धर्म भारतीय संस्कृति की पहचान है। एक व्यक्ति की इच्छाशक्ति में इतनी शक्ति होती है कि वह कुछ भी प्राप्त कर सकता है। चाहे वह स्त्री हो या पुरुष। प्रकृति ने कोई भेदभाव नहीं किया है। वट सावित्री कथा में ऐसी ही स्त्री की कथा है, जिसने अपनी इच्छाशक्ति, दृढ़ निश्चय, निडरता के साथ पतिव्रता सावित्री यमराज से अपनी बात मनवाकर अपने पति को मौत के मुंह से वापस लेके आ गयी। तो चलिएं हम बात करते है सवित्रियों से और पूछते है कि उनकी पहली वट-सावित्री पूजा कैसी थी?

जूही शर्मा
शादी के बाद एक बार फिर से दुल्हन के जैसे तैयार होने का मुझे फिर से दोबारा मौका मिला था। बड़ों का आशीर्वाद और प्यार मिला। यह पूजा पति-पत्नी के रिश्तों को मजबूत करता है।

कमला नारायण
मेरे लिए तो पहली सावित्री पूजा से लेकर अभी तक की सारी पूजा खास रही है। मैं और मेरे पति एक दूसरे का साथ रहें, यही मेरी ईश्वर से प्रार्थना है। हम दोनों का रिश्ता सात जन्म तक ऐसा ही बना रहे।

रश्मि सहाय
पहली सावित्री पूजा में ही मेरी खुशियों के द्वार खोल दिया। वट सावित्री पूजन के दिन अपने परिवार में सुख और समृद्धि की कामना की। इस पूजन के बाद इसके पुण्य प्रताप ने हमारे घरों में खुशियों और समृद्धि का द्वार खुल गया।

निदेशना
हमारे जीवन में छोटी-छोटी खुशियों का बड़ा महत्व है। व्रत और त्योहार हमारे परिवार को जोड़कर रखते है। हर घर में एक सावित्री है, जो अपने पति, परिवार को मुसीबतों के मुंह से वापस लाने में सक्षम है।

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