Tue. May 26th, 2020

मेन रोड गुरुद्वारा में नौंवें गुरु तेग बहादुर का शहीदी पर्व श्रद्धापूर्वक मना

सावल सुंदर रामईया, मेरा मन लागा तोहि…

रांची : गुरुद्वारा श्री सिंघ सभा मेन रोड रांची की ओर से रविवार को सिखों के नौंवें गुरु तेग बहादुर का शहीदी पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। अखंड पाठ के भोग के बाद विशेष दीवान की शुरूआत स्त्री सत्संग सभा की खेम कौर, सुरिंदर कौर, सोनिया कौर, परमजीत कौर, डिंपल कौर और तृप्ता कौर ने शबद गायन कर की। हजूरी रागी भाई संदीप सिंह ने कबीर दास द्वारा रचित वाणी सावल सुंदर रामईया, मेरा मन लागा तोहि… और गुरु रामदास द्वारा सूही राग में रचित जीऊ सभ को तेरे वसि असा जोर नाही..दो शबद गाये।

उनके बाद हजूरी रागी भाई भरपूर सिंह और उनके साथियों ने मधुर वाणी में विचित्र नाटक की पंक्तियों तिलक जंझु राखा प्रभ ताका, कीनों बड़ो कलु महि साका…और रे मन स्यों कर प्रीत सरवल गोविंद गुण सुनो और गावौ रसना गीत…शबद गायन कर संगत का मन मोह लिया। स्त्री सत्संग सभा की चरणजीत कौर, डिंपल कौर और राजरानी कौर ने गुरु महाराज के जीवन और उनके हिंदु धर्म की रक्षा के लिए बलिदान की महान गाथा का वर्णन किया।

गुरु तेग बहादुर द्वारा दी गई शहादत को मानवीय हितों और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए अनूठा बताया। सरदार गुरमीत सिंह ने भय काहू कऊ देत नहि नहि भय मानत आन…की व्याख्या करते हुए संगत का आह्वाण किया कि गुरु महाराज की वाणी और आदर्शों को जीवन में उतारें।

सिख न जुल्म करता और न सहता : विक्रमजीत
हेडग्रंथी ज्ञानी बिक्रमजीत सिंह ने गुरु तेग बहादुर के शहीदी गुरुपर्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानवाधिकारों की शुरूआत सिखों के नौंवें गुरु तेग बहादुर ने उस समय शहादत देकर की थी, जिस समय धर्म के नाम पर कत्लेआम हो रहा था। अगर उन्होंने शहादत न दी होती, तो आज हिंदू धर्म नहीं होता। सिख न जुल्म करता है और न ही जुल्म सहता है।

उसकी यह परंपरा शुरू से ही चली आ रही है कि जहां जुल्म के खात्मे के लिए तलवार जरूरी है वहीं जुल्म के लिए शीश देने के लिए भी तैयार रहते हैं। गुरु तेग बहादुर दुनिया के अकेले ऐसे शहीद हैं जिनके शीश का संस्कार दिल्ली में और धड़ का संस्कार आनंदपुर साहिब में हुआ। स्त्री सत्संग सभा द्वारा आयोजित शहीदी गुरुपर्व में हुए प्रो हरमिंदरबीर सिंह ने गुरु तेग बहादुर की शहादत पर प्रकाश डाला।

झामुमो नेत्री ने मत्था टेका
झामुमो नेत्री डॉ महुआ मांझी ने भी गुरु के चरणों में मत्था टेका। स्त्री सत्संग सभा की खेम कौर,परमजीत कौर ने सस्वर आनंद साहिब का पाठ किया और हेडग्रंथी विक्रमजीत सिंह ने अरदास कर दीवान की समाप्ति की। मंच का संचालन सिमरन जोत कौर ने किया। गुरु के अटूट लंगर में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। श्री गुरु सिंह सभा के महासचिव गगनदीप सिंह सेठी ने स्त्री सत्संग सभा का आभार जताया।

मौके पर कार्यक्रम में गुरुद्वारा के प्रधान गुरमीत सिंह, मलकीयत सिंह, मनजीत कौर, सुरिंदरपाल कौर, बलबीर कौर, परमजीत कौर, प्रितपाल कौर, दलजीत कौर, कृपाल सिंह, भुपेंद्र सिंह आनंद, मनदीप सिंह, जसप्रीत सिंह, इकबाल सिंह, हरजीत सिंह स्विंकी, हरभजन सिंह होड़ा, रावैल सिंह, कुलदीप सिंह, इंदर सिंह होरा, बलबीर सिंह चाना, ध्यान सिंह, जसबीर सिंह, मोहन सिंह, गुरजीत सिंह छतवाल, परमजीत सिंह छतवाल, परमजीत सिंह चाना, हरजिंदर सिंह, परमजीत कौर, बलबीर कौर समेत अन्य लोग मौजूद थे।

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