Sun. Sep 27th, 2020

सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिक पार्टियों को सख्त निर्देश – उम्मीदवारों का क्रिमिनल रिकॉर्ड बताएं

आदेश का पालन नहीं करने पर अवमानना की चेतावनी

नयी दिल्ली : राजनीति को अपराधियों के चंगुल से मुक्त कराने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम निर्देश देते हुए राजनीतिक दलों से कहा कि वह चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों का क्रिमिनल रिकॉर्ड जनता के सामने रखे। कोर्ट ने कहा कि वह प्रत्याशियों के आपराधिक रेकॉर्ड को साइट पर अपलोड करे। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने साथ ही आगाह किया है कि इस आदेश का पालन नहीं किया गया, तो अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

कोर्ट ने राजनीतिक दलों से कहा कि वे अपने प्रत्याशियों के नामांकन क्लीयर होने के 48 घंटे के अंदर आपराधिक रिकॉर्ड को अखबारों, बेवसाइट्स और सोशल साइट्स पर प्रकाशित करें। सियासी दलों को ऐसे उम्मीदवार को चुनने के 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी, जिसके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। जिन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं, उनके बारे में अगर राजनीतिक दल कोर्ट की व्यवस्था का पालन करने में असफल रहते हैं तो चुनाव आयोग इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाएगा।

न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति एस. रवीन्द्र भट की पीठ ने भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय और रामबाबू शर्मा की अवमानना याचिका पर यह आदेश दिया। न्यायालय ने इन निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर चुनाव आयोग को इस बात की अनुमति दी है कि वह राजनीतिक दलों के खिलाफ यह जानकारी न्यायालय को अवगत कराए।

बताना होगा बेदाग को टिकट क्यों नहीं दिया

राजनीति का अपराधीकरण रोकने के लिए न्यायालय ने राजनीतिक दलों के लिए गाइडलाइन जारी की है। कोर्ट ने कहा कि पिछले चार आम चुनावों में राजनीति में अपराधीकरण तेजी से बढ़ा है। इसके अनुसार, यदि राजनीतिक दलों द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को टिकट दिया जाता है तो उन्हें यह भी बताना होगा कि किसी बेदाग को टिकट क्यों नहीं दिया गया।

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