Wed. Dec 11th, 2019

सुपर हॉट फाइट. सत्ता के मुखिया और संगठन के बागी में दिलचस्प मुकाबला – भाजपा के गढ़ में टकरा रहे दो भाजपायी

 रघुवर दास के खिलाफ सरयू राय की गहरी चाल
2005 में मृगेन्द्र का टिकट काट कर मिला था सरयू को

कविकुमार

जमशेदपुर : 2005 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने तबके वित्त मंत्री मृगेंद्र प्रताप सिंह का टिकट काट दिया था और जमशेदपुर पश्चिम सीट से बिहार के नेता सरयू राय को टिकट दिया था। मृगेंद्र प्रताप सिंह को हराकर सरयू राय ने चुनाव जीता। 2019 का चुनाव उस इतिहास को दोहरा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने मंत्री सरयू राय का टिकट काट दिया। सरयू राय का टिकट कटवाने और मृगेंद्र प्रताप सिंह का टिकट कटवाने दोनों मामलों में रघुवर दास का हाथ बताया गया।

सरयू राय और मृगेंद्र प्रताप सिंह का मामला एक सा है। फर्क इतना है कि मृगेंद्र प्रताप सिंह ने राजनीतिक भूल करते हुए टिकट कटने पर लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल का दामन थाम लिया था और जमशेदपुर पश्चिम सीट से राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में कूद पड़े थे। नतीजा यह हुआ कि उन्हें टिकट न मिलने के चलते नाराज भाजपाई चाहते हुए भी उनका साथ नहीं दे सके। उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी सरयू राय को वोट दिया और मृगेंद्र प्रताप सिंह हार गये।

भाजपा के खिलाफ नहीं बोल रहे सरयू

चुनाव मैदान में सरयू राय मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके रिश्तेदारों द्वारा किये गये कथित भ्रष्टाचार का उल्लेख कर रहे हैं, पर वे भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोल रहे हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद भी भाजपा ने अब तक सरयू राय को दल से नहीं निकाला है। यह चुप्पी भी एक अलग संदेश दे रहा है।

सरयू राय ने मृगेन्द्र प्रताप की राजनीतिक भूल से ली सबक

मृगेंद्र प्रताप सिंह की राजनीतिक भूल से सबक लेते हुए सरयू राय ने टिकट कटने पर मुख्यमंत्री रघुवर दास के चुनाव क्षेत्र जमशेदपुर पूर्वी से चुनाव लड़ने का फैसला किया, परंतु उन्होंने किसी दूसरे दल का दामन नहीं थामा। अगर वे अपनी सिटिंग सीट जमशेदपुर पश्चिम से ही भाजपा के बागी प्रत्याशी बनते हैं तो यह समझा जाता कि वे भारतीय जनता पार्टी के दुश्मन हैं, पर उन्होंने जमशेदपुर पूर्वी सीट से चुनाव लड़ कर यह साबित कर दिया कि वे भाजपा के नहीं, बल्कि सिर्फ रघुवर दास के विरोधी हैं।

यह सरयू राय की एक गहरी राजनीतिक समझदारी है। इसका नतीजा यह हुआ की सरयू राय को भारतीय जनता पार्टी के वैसे लोगों का वोट मिल सकता है, जो भाजपा के पारंपरिक वोटर हैं, पर मुख्यमंत्री रघुवर दास से नाराज हैं। जमशेदपुर पूर्वी इलाके के लोग मुख्यमंत्री रघुवर दास से सिर्फ इसलिए नाराज हैं कि उन्होंने कई बार झल्लाकर कहा है कि क्या मैंने आपसे वोट मांगा था? ऐसे लोग सरयू राय के समर्थन में आ सकते हैं।

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