Sun. Sep 27th, 2020

…तो क्या वातावरण की सफाई कर रही है प्रकृति

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कोरोना से पूरी दुनिया में अफरा-तफरी मची है। लेकिन लोग इधर, उधर भाग नहीं रहे हैं, बल्कि अपने घरों में कैद हो रहे हैं। लोगों की भाग-दौड़ बंद होने से प्राकृतिक वातावरण की सफाई हो रही है। जी हां, लोगों के क्वारेंटाइन अपनाने के कारण पूरी दुनिया में एक साथ वायु प्रदूषण में कमी आने लगी है। चीन और इटली में वायु प्रदूषण में कमी आयी है। यह यूं ही नहीं कहा जा रहा है, बल्कि नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी की तस्वीरें कह रही है। तो क्या प्रकृति वातावरण से गंदगी हटाने का अभियान चला रखा है?

एक ओर कोरोना वायरस के कारण लोग घरों में बंद हो रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ नहीं है, सड़कें खाली हो रही हैं, मॉल, सिनेमा हॉल खाली हैं, बस स्टॉप और रेलवे स्टेशनों पर भीड़ कम हो गयी है, उद्योगों में कम उपस्थिति है, बाजार में लोग कम पहुंच रहे हैं और लोगों की गतिविधियां कम होने के कारण वातावरण से नाइट्रोजन आॅक्साइड, ओजोन, सल्फर डाइआॅक्साइड, कार्बन मोनोआॅक्साइड और मीथेन गैस का प्रतिशत भी एकदम से कम हो गया। ये वही गैसे हैं, जो मानव जीवन ही नहीं, प्रकृति के सभी जीवों के लिए खतरनाक हैं। इन खतरनाक गैसों के कम होने से वायु बिल्कुल साफ हो रहा है।

कम हो रहा वायु प्रदूषण

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच इटली चीन के बाद दूसरे नंबर का देश हो चुका है। इटली में एक तरफ कोरोना वायरस का कोहराम मचा हुआ है तो दूसरी ओर इसकी वजह से कई फायदेमंद बातें भी देखने में आई हैं। हाल ही में दिखी सैटेलाइट इमेज से पता चला कि वहां कोविड-19 से लड़ने के लिए जो तरीके अपनाए जा रहे हैं, उससे वायु प्रदूषण घटा है।

सैटेलाइट कॉपरनिकस सेंटिनेल-5पी वातावरण में वायु प्रदूषण पर नजर रखता है। इसी की कुछ तस्वीरों ने यूरोपियन स्पेश एजेंसी (इएसए) को भी चौंका दिया। तस्वीरों में साफ है कि 2020 के शुरुआती ढाई महीनों यानी जनवरी से अब तक में वहां की हवा में नाइट्रोजन आॅक्साइड और दूसरी कई जहरीली गैसों की मात्रा अप्रत्याशित ढंग से कम हो गई है। इएसए वायु प्रदूषण के कम होने में कोविड-19 की वजह से हुए लॉकडाउन को मान रहा है।

इएसए के मिशन मैनेजर क्लाउस जेनर के अनुसार वायु प्रदूषण में कमी की कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन फिलहाल कोविड-19 की वजह से लोगों का घर से बाहर कम निकलना या ट्रैवल पर पाबंदी एक बड़ी वजह है। इधर, कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच इटली चीन के बाद दूसरे नंबर का देश हो चुका है, जहां प्रभावित मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। डब्लूएचओ के ताजा आंकड़ों के अनुसार यहां अबतक लगभग 28 हजार मामले आ चुके हैं और 2 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। उत्तरी इटली में मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है। यही वजह है कि इटली के पीएम ने वहां पूरी तरह से लॉकडाउन के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही पूरे देश में ही होम क्वरेंटाइन का पालन हो रहा है, ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।

होम क्वारेंटाइन का पड़ा प्रभाव

लोगों का घर से निकलना रुकने या लगभग बंद होने के साथ ही पब्लिक और प्राइवेट ट्रांसपोर्ट भी सड़कों पर घटे। इसी वजह से हवा में न केवल नाइट्रोजन आॅक्साइड, बल्कि ओजोन, सल्फर डाइआॅक्साइड, कार्बन मोनोआॅक्साइड और मीथेन गैस का प्रतिशत भी एकदम से कम हो गया। ये सारी गैसें वहीं हैं, जो इंसानी सेहत के अलावा सीधे-सीधे क्लाइमेट चेंज के लिए जिम्मेदार हैं।

क्या है ये सैटेलाइट

कॉपरनिकस सेंटिनेल-5पी को इएसए का सबसे एडवांस सिस्टम माना जा रहा है, जो वायु प्रदूषण को मॉनिटर करता है। ये न केवल यूरोपियन देशों, बल्कि पूरी दुनिया में आॅक्सीजन और दूसरी गैसों के ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन पर नजर रखता है। इएसए के साथ-साथ यूरोपियन कमिशन की भी इस सैटेलाइट के निर्माण में भागीदारी रही है।
कॉपरनिकस सेंटिनेल-5पी वायु प्रदूषण को मॉनिटर करता है

दिलचस्प बात ये है कि न केवल इटली, बल्कि चीन के वातावरण में भी प्रदूषण में भारी कमी देखी जा रही है। यूएस और यूरोपियन सैटेलाइज की तस्वीरों में ये दिखाई देता है। नासा अर्थ आॅब्जर्वेटरी ने फरवरी के अंत में एक रिपोर्ट में बताया कि चीन में लॉकडाउन होने के बाद से वहां की हवा की क्वालिटी सुधरी है। इंडस्ट्रियल इलाकों के बंद होने और लोगों के घर से काम करने के कारण वहां भी नाइट्रोजन आॅक्साइड और मीथेन जैसी जहरीली गैसों का प्रतिशत कम हुआ।

नासा के गॉडर्ड स्पेश फ्लाइट सेंटर के एयर क्वालिटी रिसर्चर फी लियू बताते हैं कि ये पहली बार है कि किसी घटना के दौरान चीन की एयर क्वालिटी में इतना बदलाव दिख रहा है। हालांकि इससे पहले 2008 में आई आर्थिक मंदी के दौरान भी कई कारखाने बंद हुए, जिसका असर हवा पर पड़ा और वायु प्रदूषण घटा, लेकिन कभी भी इतना स्पष्ट बदलाव देखने में नहीं आया था।

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