Wed. Feb 19th, 2020

शरजील इमाम के बयान पर सेक्यूलरवादियों की चुप्पी तो देखें

1 min read

“देश के भीतर आज भी सैकड़ों दुस्साहसी देशद्रोही पल रहे हैं। अब देश को तोड़ने की चाहत रखने वालों के खिलाफ पूरे देश को कमर कसकर लामबंद होना होगा। अखंड भारत की अवधारणा को चरम पर पहुंचाने वाले सम्राट चंद्रगुप्त और अशोक की धरती बिहार की किस्मत में अब कैसे-कैसे गद्दार पलने लगे हैं। यह शरजील भी नालन्दा के पास जहानाबाद का ही रहनेवाला है। एक तो यह ‘टुकड़े-टुकड़े’ गिरोह का नेता है, दूसरा कहता है कि असम और पूर्वोत्तर राज्यों को ही भारत से काटकर अलग कर दो।”

“पुरानी दिल्ली में मंदिर को तोड़े जाने पर कुछ सेक्युलरवादी सलाह दे रहे थे कि इसकी कहीं चर्चा तक न करें वरना देश का साम्प्रदायिक माहौल खराब हो जायेगा। यही लोग मॉब लीचिंग केस पर पूरे हिन्दू समाज को दुर्दांत साबित करने पर तुल जाते हैं। अब इमाम के देश को तोड़ने के आह्वान पर भी सेक्युलरवादी और मानवाधिकारवादी अपने घरों में छिप गए हैं। ये कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। तो देख लें इनके चेहरे-मोहरों को।”

आर. के. सिन्हा

असम और तमाम पूर्वोत्तर प्रदेशों को देश से तोड़कर अलग करने का आह्वान करने वाले शख्स शरजील इमाम ने भारी भीड़ के सामने माइक से भाषण देते हुये जो कुछ भी कहने की हिमाकत की उससे तो अब सारा देश वाकिफ हो चुका है। मतलब साफ है कि देश के भीतर आज भी सैकड़ों दुस्साहसी देशद्रोही पल रहे हैं। अब देश को तोड़ने की चाहत रखने वालों के खिलाफ पूरे देश को कमर कसकर लामबंद होना होगा। अखंड भारत की अवधारणा को चरम पर पहुंचाने वाले सम्राट चंद्रगुप्त और अशोक की धरती बिहार की किस्मत में अब कैसे-कैसे गद्दार पलने लगे हैं।

यह शरजील भी नालन्दा के पास जहानाबाद का ही रहनेवाला है। एक तो यह ‘टुकड़े-टुकड़े’गिरोह का नेता है, दूसरा कहता है कि असम और पूर्वोत्तर राज्यों को ही भारत से काटकर अलग कर दो। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और राष्ट्रकवि दिनकर की धरती अचानक गद्दारों को थोक भाव में कैसे जन्म देने लगी? इमाम जैसे देशद्रोहियों के कारण महात्मा गांधी की आत्मा भी आज अवश्य दुखी होगी। करमचन्द गांधी को महात्मा गांधी बिहार की धरती चंपारण आंदोलन ने ही बनाया था।

शाहीन बाग के पीछे देशद्रोही ताकतें

दरअसल शरजील इमाम भी जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी का छात्र है, जो ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का जन्मदाता है। शरजील खुद को शाहीन बाग में चल रहे विरोध प्रदर्शन का मुख्य आयोजक बताता रहा है। यदि ऐसा है तो देश को यह जानना जरूरी है कि इतने भारी-भरकम जलसे का धन उसे कहां से प्राप्त हो रहा है। उसकी आमसभा के एक वीडियो को देखकर ही सारा देश सन्न है। अपने खास लोगों की मीटिंग में वह कैसी आग उगलता होगा, इसकी कल्पना कर रौंगटे खड़े हो जाते हैं।

शरजील वीडियो में कहता है कि ‘अगर हमें असम के लोगों की मदद करनी है तो उसे भारत से कट करना होगा।’ इमाम के इस वीडियो को देखकर अब सबकी समझ में आ गया है कि शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन के पीछे कुछ घोर देश विरोधी ताकतें भी काम कर रही हैं। इस सारे घटनाक्रम में अच्छी बात यह हुई कि छह राज्यों असम, मणिपुर, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

वायरल वीडियो में शरजील इमाम बेहद बेशर्मी से कह रहा है-‘मेरी नजर में आगे का प्लान हमारे सामने यह होना चाहिए कि हमलोग अपना एक इंटलेक्चुअल सेल बनाएं, जिसे गांधी, नेशन इन सब चीजों में लगाव न हो। आपको पता होना चाहिए कि 20वीं सदी का सबसे फासिस्ट लीडर गांधी खुद है। कांग्रेस को हिंदू पार्टी किसने बनाया?’ अब इस अज्ञानी को कौन बताए कि गांधीजी तो जीवनभर मुसलमानों के हक में ही लड़ते रहे। पर उसे तथ्यों से क्या लेना-देना।

वह तो भारत को इस्लामी मुल्क बनाना चाहता है। शरजील यह भी कहता है, ‘लोग हमारे पास ऑर्गनाइज्ड हों तो हम हिंदुस्तान और नॉर्थ ईस्ट को परमानेंटली कट कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं भी तो कम से कम एक-आध महीने के लिए तो कट कर ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों और सड़कों पर कि उन्हें हटाने में ही एक महीना लग जाये।’

पुरस्कार वापसी गैंग की बोलती बंद

इमाम का वीडियो देखने वाले प्रगतिशील और पुरस्कार वापसी गैंग के नेता अब तो नहीं कहेंगे कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है, लेकिन वे कुछ कह भी तो नहीं रहे हैं। उनकी भी बोलती बन्द है। मजे की बात यह है कि भाजपा नेताओं के अतिरिक्त किसी भी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टी के नेता ने इस देशद्रोही की निन्दा तक नहीं की है। देश के नौजवान, जिनको भविष्य की चुनौतियों का सामना करना है, यह जरूर जानना चाहेंगे कि क्या धर्मनिरपेक्ष होने का अर्थ देशद्रोहियों का समर्थक होना होता है? शरजील खुल्लम-खुल्ला कह रहा है,’असम में जो मुसलमानों का हाल है आपको पता है। सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) लागू हो गया वहां।

डिटेंशन कैंप में लोग डाले जा रहे हैं। वहां कत्ल-ए-आम चल रहा है। छह-आठ महीने में पता चला सारे बंगालियों को मार दिया, हिंदू हो या मुसलमान।’ वह मुसलमानों को खुलेआम झूठी अफवाहें फैलाकर भड़का रहा है। पूर्वोत्तर को भारत से जोड़ने वाले पतले से भूभाग, जिसे किन्स नेक’ कहा जाता है, शरजील उसका भी जि़क्र करते हुए कहता है, ‘यहां मुसलमान अधिक संख्या में हैं और वे ऐसा कर सकते हैं।’ शाहीन बाग में जो औरतें और बच्चियां धरने पर बैठी हैं,यह अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे भारत को बांटने वाले इन तत्वों को खदेड़ दें। एक सवाल यह भी है कि बोलते समय ही इमाम जैसे गुंडे को पुलिस के हवाले क्यों नहीं किया गया।

सेक्युलरवादियों का दोहरा चरित्र

हैरानी इस बात की भी है कि इमाम की बयानबाजी के खिलाफ भाजपा के अतिरिक्त कोई भी दल बोल नहीं रहा है। हैरानी इस बात से भी है कि मोदी सरकार को मॉब लीचिंग के मामलों में घेरने वाले झोलाछाप लेखक, कवि, चित्रकार बिरादरी की भी जुबानें सिल गयी हैं। उन्हें भी इमाम के बयान में कुछ भी असामान्य नहीं लग रहा है। दरअसल सेक्युलरवादियों का दोहरा चरित्र बारबार देश के सामने आता रहता है। आपको याद होगा कि विगत वर्ष देश की राजधानी दिल्ली में एक मंदिर पर हमला कर दिया गया था।

पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में 100 साल पुराने दुर्गा मंदिर को बुरी तरफ से ध्वस्त किया गया। मंदिर पर लगे शीशे तोड़ डाले गए और देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी खंड़ित किया गया। इस मसले का एक पहलू यह भी रहा था कि किसी भी सेक्युलरवादी ने मंदिर को तोड़े जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं की। पर फतेहपुरी मस्जिद के इमाम ने ध्वस्त मंदिर को फिर से खड़ा करने के लिए मुसलमानों से आगे आने की अपील की।

इमाम साहब ने सेक्युलरवादियों के सामने भी उदाहरण रखा कि किस तरह से सच के साथ खड़ा हुआ जाता है। मॉब लिचिंग पर देश और विदेशों में हंगामा करने वाले सेक्युलरवादी और मानवाधिकारवादी पुरानी दिल्ली में दुर्गा मंदिर तोड़े जाने पर अज्ञातवास में चले गए थे। इन्हें मंदिर के नुकसान पर कहीं कोई असामान्य बात नजर नहीं आ रही थी। जब छोटे-छोटे मामलों में चर्चों और मस्जिदों में कुछ हो जाये तो देखिए सेक्युलरवादियों के मोमबत्ती जुलूस? लेकिन पचासी फीसद हिन्दुओं, सिखों, जैनियों, बौद्धों की इन्हें कोई परवाह नहीं।

पुरानी दिल्ली में मंदिर को तोड़े जाने पर कुछ सेक्युलरवादी सलाह दे रहे थे कि इसकी कहीं चर्चा तक न करें वरना देश का साम्प्रदायिक माहौल खराब हो जायेगा। यही लोग मॉब लीचिंग केस पर पूरे हिन्दू समाज को दुर्दांत साबित करने पर तुल जाते हैं। अब इमाम के देश को तोड़ने के आह्वान पर भी सेक्युलरवादी और मानवाधिकारवादी अपने घरों में छिप गए हैं। ये कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। तो देख लें इनके चेहरे-मोहरों को।

(लेखक राज्यसभा सदस्य हैं।)
shares
error

Enjoy this blog? Please spread the word :)