Wed. Dec 11th, 2019

बागियों, निर्दलीयों, छोटे दलों ने चुनावी तड़के में लगाया छौंका

1 min read

अधिसंख्य सीटों पर मतों का जोरदार बिखराव

ज्यादातर जगहों पर आमने-सामने की टक्कर नहीं

रांची :पहले चरण में झारखंड की 13 सीटों पर मतदाता सम्पन्न हो चुके हैं। अभी तक जो रूझान सामने आये हैं, उससे स्पष्ट है कि ज्यादातर जगहों पर दो प्रत्याशियों के बीच आमने-सामने की टक्कर नहीं दिखायी पड़ रही है। अन्य उम्मीदवारों के खाते में भी झोली भर वोट गये हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि प्रत्याशियों के बीच मतों का बिखराव जोरदार हुआ है।

नतीजन, राजनीतिक पंडित भी मतदाताओं की अपनी सूझबूझ और रणनीति से चकराये हुए हैं। ऐसी स्थिति सिर्फ पहले चरण में हुए चुनाव की नहीं है। अमूमन झारखंड की अधिकांश सीटों पर ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। कहा जा सकता है कि बागियों, निर्दलीयों और छोटे-छोटे दलों ने चुनावी तड़के में छौंका लगा दिया है, जिसकी महक राजनीति के मैदान में पूरे झारखंड के 81 विधानसभा सीटों में फैल रही है।

चार-पांच प्रत्याशी रखते हैं 20 हजार से अधिक वोट लाने की कुब्बत
दूसरे चरण में सर्वाधिक 20 सीटों पर सात दिसंबर को चुनाव होने जा रहे हैं। इनमें कोल्हान की 13 और दक्षिणी छोटनागपुर की सात सीटें शामिल हैं। इनमें से कुछेक सीटों को छोड़ ज्यादातर सीटों पर या तो त्रिकोणीय या फिर चतुष्कोणीय मुकाबले के आसार साफ दिखायी पड़ रहे हैं। जमशेदपुर पूर्वी और पश्चिमी और बहरागोड़ा सीटों पर यह कहा जा सकता है कि इन सीटों पर दो दलों के बीच आमने-सामने की टक्कर है।

मगर,घाटशिला, चक्रधरपुर, सरायकेला, खरसांवा, तमाड़, तोरपा, खूंटी, मांडर, कोलेबिरा जैसी सीटों पर या तो तीन प्रत्याशी या फिर चार-पांच प्रत्याशी चुनाव में दंगल भर रहे हैं। इनमें से अधिकांश प्रत्याशी ऐसे हैं, जो सिर्फ अपने दम पर 20-25 हजार वोट लाने की कुब्बत रखते हैं। ऐसे में इन सीटों के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं। दरअसल, इस बार के चुनाव में कई सीटों पर बागी, निर्दलीय प्रत्याशी और छोटे दलों का अपना-अपना वजूद है।

राजा पीटर, कुंदन पाहन भी चुनावी मैदान में
कोलेबिरा, खूंटी, तोरपा, तमाड़ जैसी सीटों पर छोटे दल झारखंड पार्टी का अपना जनाधार है। तमाड़ में राजा पीटर और कुंदन पाहन जैसे प्रत्याशी चुनावी समर में हैं। दूसरे चरण में होने वाले मतदान की कई सीटों पर बड़े दलों के कई बागी भी या तो निर्दल या फिर छोटे दलों की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। पलायन, विस्थापन के खिलाफ हमेशा मुखर रहने वाली दयामणि बारला भी खूंटी के चुनावी समर में मजबूती से खड़ी दिखायी पड़ रही हैं।

वाम दल भी प्रभावित करेंगे चुनावी नतीजे
जहां तक तीसरे चरण में होने वाले चुनावों की है, कोडरमा, बरकट्ठा, बरही, मांडू, हजारीबाग, सिमरिया, बड़कागांव, रामगढ़, धनवार, गोमिया, बेरमो, ईचागढ़, सिल्ली, खिजरी, रांची, हटिया और कांके, कुल मिलाकर 17 सीटों पर मतदान 12 दिसंबर को होने जा रहे हैं। इनमें से अधिकांश सीटों पर भी तीन से पांच प्रत्याशी पूरे दमखम के साथ चुनावी रण में हैं। इनमें भाजपा, गठबंधन के अलावा झारखंड विकास मोर्चा और आजसू के बीच चुनावी जंग चल रही है। सभी राजनीतिक दलों का संगठन इन सीटों पर मजबूत है।

इन सभी के बीच वाम दल भी कई सीटों पर चुनावी नतीजे निश्चित तौर पर प्रभावित करेंगे। सीटें जीतने की कुब्बत तो वाम दलों में कम ही दिखायी पड़ रही है। मगर, कुछ सीटों में अलग-अलग वामदलों का अपना वोटबैंक हैं। जीतने वाले प्रत्याशी को वह हरा सकते हैं तो दूसरे नंबर पर आने वाले को ऐन वक्त पर पहले नंबर पर ला सकते हैं। अलग-अलग सीटों में जातिगत समीकरण अलग हैं। भाजपा, आजसू और झामुमो के बीच कुर्मी बेल्ट की सीटों पर ज्यादा से ज्यादा जातिगत वोटों को हासिल करने की होड़ है।

ऐसी परिस्थितियों के बीच इन सीटों पर ऐसे में किसी एक अथवा दो प्रत्याशियों के बीच बल्क वोटिंग की संभावना कम ही नजर आ रही है। ऐसे में मतों का विभाजन कई सीटों पर चौंकाने वाले रिजल्ट भी यदि दे, तो यह हैरत की बात नहीं होगी।

धनबाद इलाके और संताल में भी है दिलचस्प जंग
धनबाद के आसपास के कई विधानसभा सीटों पर कई ऐसे प्रत्याशी बतौर निर्दल चुनावी समर में हैं, जिनका अपने इलाके में एक तरह से दबदबा सा रहा है। कई हजार वोट लाने की स्थिति में वह दिखायी पड़ रहे हैं। जहां तक संताल की बात है, इस बार पहले की तरह वहां सिर्फ झामुमो और भाजपा के बीच सीधी लड़ाई नहीं है। चुनावी जंग में बाबूलाल की अगुवाई वाली झाविमो और सुदेश महतो की आजसू पार्टी मुकाबले को दिलचस्प बना रही है।

चौथे और पांचवे चरण के तहत होने वाले मतदान वाली सीटों पर भी कम से कम अस्सी फीसदी सीटें ऐसी हैं, जहां त्रिकोणीय अथवा चतुष्कोणीय मुकाबले के आसार दिखायी पड़ रहे हैं। काफी कम सीटें फिलहाल ऐसी दिखायी पड़ रही हैं, जहां सिर्फ दो प्रत्याशियों के बीच आमने-सामने की लड़ाई हो। 81 में से 60 से 65 सीटों के बारे में यह कहा जा सकता है कि चुनाव में सिर्फ दो प्रत्याशी दो-दो हाथ कर रहे हैं।

बागियों की बौछार, निर्दलीयों की बाढ़ और छोटे-छोटे दलों के अपने-अपने पॉकेट में अपना प्रभाव भाजपा, झामुमो, कांग्रेस, झाविमो, आजसू जैसे बड़े राजनीतिक दलों को हैरान-परेशान किये हुए है। सभी दल इनके प्रभाव की काट की तलाश कर चुनावी रणनीति तैयार कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

shares
error

Enjoy this blog? Please spread the word :)