Sat. Jul 4th, 2020

दमनकारी समाज के पाखंड को दर्शाती है ‘रसभरी’ : स्वरा भास्कर

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मुंबई : बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर का कहना है कि उनकी वेब सीरीज ‘रसभरी’ समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को दर्शाती है, जैसे दमनकारी समाज का पाखंड और महिला कामुकता का मौलिक डर। शो उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की प्रेम कहानी को दिखाया गया है। वेब सीरीज ‘रसभरी’ में स्वरा एक अंग्रेजी शिक्षक शालू बंसल की भूमिका निभाती हैं जो नंद (आयुष्मान सक्सेना) के लिए आकर्षण का केंद्र है।

स्वरा भास्कर की वेब सीरीज ‘रसभरी’ 25 जून को अमेजन प्राइम पर स्ट्रीम हो चुकी है। स्वरा भास्कर ‘रसभरी’ में मेरठ के एक मोहल्ले में अंग्रेजी की टीचर होती है, जबकि स्कूल के बाहर वह अपनी अपनी खूबसूरत अदाओं से लोगों को रिझाने का काम करती हैं। स्कूल का ही एक लड़का नंद किशोर त्यागी अपनी टीचर को पसंद करने लगता है। यहीं से शुरू होती है शो की कहानी। इस आठ एपिसोड की वेब सीरीज में स्वरा भास्कर, नीलू कोहली, आयुष्मान सक्सेना, प्रद्युमन सिंह और चितरंजन त्रिपाठी मुख्य भूमिकाओं में है।

स्वरा ने कहा कि इस सीरीज की दिलचस्प बात यह है कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ताजी हवा की झोंके जैसे आया है, जिसमें बहुत गहरी सामग्री है। एक ओर जहां यह मनोरंजन करेगा, वहीं दूसरी ओर यह समाज में कुछ बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों को भी दर्शाता है, जिनकी हम जोर-शोर से चर्चा नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि इस शो में किशोर कामुकता, एक दमनकारी समाज का पाखंड और पुरुष प्रधान समाज में महिला कामुकता का भय को एक मजेदार तरीके से दिखाया गया है।

वहीं इस वेब सीरीज की रिलीज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया है। लेखक और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के चेयरमैन प्रसून जोशी ने भी इस पर आपत्ति जताई है। इस सीरीज का एक आपत्तिजनक सीन देखकर प्रसून जोशी ने भी काफी निंदा की है। शुक्रवार को प्रसून जोशी ने सीरीज के एक सीन पर आपत्ति जताते हुए ट्वीट किया।

उन्होंने लिखा कि दुख हुआ। वेब सीरीज ‘रसभरी’ में असंवेदनशीलती से एक छोटी बच्ची को पुरुषों के सामने उत्तेजक नाच करते हुए एक वस्तु की तरह दिखाना निंदनीय है। आज रचनाकारों और दर्शक सोचें बात मनोरंजन की नहीं, यहां बच्चियों के प्रति दृष्टिकोण का प्रश्न है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है या शोषण की मनमानी।

प्रसून जोशी के जवाब में स्वरा भास्कर ने सफाई देते हुए लिखा था कि आदर सहित सर, शायद आप सीन गलत समझ रहे हैं। सीन जो वर्णन किया है उसके ठीक उल्टा है। बच्ची अपनी मर्जी से नाच रही है, पिता देखकर झेंप जाता है और शर्मिंदा होता है। नाच उत्तेजक नहीं है, बच्ची बस नाच रही है, वो नहीं जानती समाज उसे भी सेक्शुअलाइज करेगा। सीन यही दिखाता है।

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