Sat. Jan 25th, 2020

रांची की निर्भया के हत्यारे को मिला मृत्युदंड

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रांची : वर्ष 2016 के दिसंबर महीने में बूटी बस्ती निवासी बीटेक छात्रा के घर में जबरन घुस कर, निर्ममता पूर्वक दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने के बाद उसकी हत्या कर देने और उसके शव को जला देने के जुर्म में दोषी पाये गये राहुल राज उर्फ राहुल कुमार उर्फ राज श्रीवास्तव उर्फ रॉकी राज उर्फ आर्यन उर्फ अंकित को फांसी की सजा दी गयी। यह फैसला सुबह 11:40 बजे सीबीआई के स्पेशल जज एके मिश्र की अदालत ने सुनाया। कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा हत्या के अपराध में दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म के अपराध में आजीवन कारावास, हत्या की नीयत से घर में घुसने के अपराध में आजीवन कारावास और साक्ष्य मिटाने के अपराध में उसे 7 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा दी है। कोर्ट ने उसे 20,000 रु. का जुर्माना भी लगाया है। फैसले में कहा है कि जुर्माने की राशि नहीं देने पर उसे अलग से चार माह के साधारण कारावास की सजा काटनी होगी।

कठोर फैसला न्याय की मांग : कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिवेश में प्रत्येक दिन इस तरह के गंभीर अपराध में वृद्धि हो रही है। ऐसी परिस्थिति में न्याय की मांग है कि कोर्ट अपने विवेक और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कठोर फैसला सुनाये। फांसी की सजा की घोषणा करने के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस फैसले की संपुष्टि के लिए अभिलेख को झारखंड उच्च न्यायालय अति शीघ्र भेज दिया जाए। साथ ही मामले के सूचक यानी पीड़ित छात्रा के पिता को काफी क्षति हुई है। इसलिए पीड़ित मुआवजा अधिनियम के तहत मुआवजा की सुविधा के लिए फैसले की एक प्रति डालसा कार्यालय भेजा जाए।

मुस्कुरा रहा था अदालत कक्ष में खड़ा राहुल

फांसी की सजा देने से पूर्व कोर्ट में बचाव पक्ष और सीबीआई के वकील ने सजा के बिंदु पर अपनी-अपनी दलीलें दी। दोष सिद्ध 25 वर्षीय राहुल को जेल से लाकर कोर्ट में 11:00 बजे कटघरे में खड़ा कर दिया गया। स्पेशल जज भी अपनी अदालत में बैठे हुए थे। बचाव पक्ष के वकील विनोद कुमार सिंह 11:30 बजे कोर्ट रूम में प्रवेश किए और सबसे पहले कटघरे में हथकड़ी लगाए खड़ा राहुल से मिले। बातचीत के दौरान, सुनवाई के दौरान और जज द्वारा सजा सुनाने के दौरान राहुल के चेहरे पर किसी तरह का खौफ यह नहीं देखा गया। वह सामान्य था। बल्कि वह वकील से बातचीत करते समय थोड़ा मुस्कुरा रहा था।

95 पृष्ठों का फैसला

95 पेज के अपने फैसले में विशेष जज एके मिश्र ने सभी गवाहों, दस्तावेजों, जब्त फोटो, डीवीडी तथा डीएनए रिपोर्ट की विस्तार से चर्चा की। कोर्ट ने मामले को जघन्यतम की श्रेणी में लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व निर्णयों का विस्तार से हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पूर्व मच्छी सिंह, बच्चन सिंह और पश्चिम बंगाल की धनंजय चटर्जी से संबंधित मामले का विस्तार से हवाला दिया। कहा कि इन सभी मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि गंभीर मामलों में सजा का मापदंड अपराध की गंभीरता पर ही निर्भर करता है। अपराधी का आचरण, पीड़ित की असहाय और असुरक्षा की स्थिति पर भी सजा निर्भर करती है। इस मामले में अपराधी राहुल ने जिस तरीके से छात्रा की योजनाबद्ध तरीका और विधि अपनाकर दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी। उसके बाद सबूत मिटाने की दिशा में डेड बॉडी को ही जला डाला। आरोपी का यह आपराधिक प्रवृत्ति और आचरण काफी उच्च स्तर का है। घटना 2016 में घटी है। इसके बाद आरोपी का आचरण यह दर्शाता है कि वह कानून की पकड़ से बचने के लिए चोरी का मोबाइल का इस्तेमाल करता है और अपने को छुपाने के लिए जगह भी बदलते रहा है।

फैसले से पूर्व दोष सिद्ध आरोपी का बोल

फैसले से पूर्व जब दोष सिद्ध राहुल को हथकड़ी लगाते हुए कोर्ट रूम में लाया गया, उसी दौरान उससे बातचीत हुई। पूछताछ करने पर उसने कहा कि सीबीआई ने इस मामले में मुझे फंसा दिया है। उसने अपने दोस्त बंटी उर्फ अक्षय का नाम लेते हुए कहा कि सीबीआई ने उसको गवाह बना दिया है। बल्कि दुष्कर्म करने में वह भी शामिल था। उसने कहा कि वही लड़की को रूम में लाया था, लेकिन राहुल ने शंका जाहिर करते हुए कहा कि यह वही लड़की है, यह हम नहीं कर सकते हैं। यह पूछने पर कि ऐसा हत्या तुम कैसे कर सकते हो। जवाब देते हुए उसने कहा कि उसने किसी की जान नहीं ली है। वह निर्दोष है।

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