Fri. Aug 7th, 2020

पाकिस्तान भी चीनी नक्शे कदम पर?

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“पाकिस्तान, चीन की तरह बरास्ते श्रीलंका भारत की घेरेबंदी का ख्वाहिशमंद रहा है। उसे श्रीलंका के करीब जाने का अवसर गोटाबाया के समय ही मिला था, जब वे श्रीलंका के प्रतिरक्षामंत्री थे और लिट्टे के सफाये की तैयारी चरम पर चल रही थी।”

पुष्परंजन

नया साल मनाने के वास्ते पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी कोलंबो में थे। दो दिनों के प्रवास में यह तय हुआ कि श्रीलंका और पाकिस्तान के संबंध और मजबूती से आगे बढे़गें। आर्थिक तंगहाली से गुजर रहा पाकिस्तान श्रीलंका को 25 अरब डॉलर का ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ दे आया, यह सचमुच चकित करने वाली बात है।

‘घर में नहीं है दाने और अम्मा चली भुनाने’ की वजह क्या यह बताना था कि देखो हम भारत से कम नहीं? श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे जब 30 नवंबर 2019 को भारत आये थे, पीएम मोदी ने 45 अरब डॉलर बतौर लाइन ऑफ क्रेडिट देने की घोषणा की थी। यह विदेश व्यापार में ओवर ड्राफ्ट की तरह होता है ताकि लाइन ऑफ क्रेडिट के आधार पर आप उस सीमा तक व्यापार करें, जो उसका ब्याज होता है, उतना भुगतान करना होता है।

क्या भारतीय एजेंसियों की काम बढ़ेगा

इस समय यही बताया गया कि मुक्त व्यापार को और मजबूत करने के वास्ते पाकिस्तान के विदेश मंत्री कोलंबो आये थे। पाकिस्तान ने श्रीलंका के सौ छात्रों को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है। ‘पीपुल टू पीपुल कॉन्टेक्ट कार्यक्रम’ के तहत यह भी तय हुआ कि 2020 में श्रीलंकाई बौद्ध, पाकिस्तान के बुद्धिस्ट सर्किट को देखने जाएंगे, बदले में ज्यादा से ज्यादा पाकिस्तानी पर्यटक इस आईलैंड नेशन को देखने आएंगे। हमारी दक्षिणी समुद्री सीमा पर क्या यह सब भारत की खुफिया एजेंसियों का काम बढ़ायेगा?

यह दिलचस्प है कि श्रीलंका में खुफिया एजेंसियों ने 21 अप्रैल 2019 को सीरियल बम धमाके में पाकिस्तान पर आरोप की आंच को आगे नहीं बढ़ने दी। घटना के 48 घंटे तक भारत में हिंदी के कुछेक चैनल लगातार खबरें चला रहे थे कि सीरियल विस्फोट में पाकिस्तान का हाथ है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई इस योजना की सूत्रधार रही है। श्रीलंकाई सरकार को मिली विदेशी इंटेलीजेंस इनपुट में यह भी जानकारी दी गयी थी कि तौहीद जमात के नेता जरान हाशमी, जलहल हितल, सजित मौलवी, सिल्हन श्रीलंका मेें आये थे और सीरियल विस्फोट को अंजाम देने की तैयारी में इनका ही हाथ था।

इतनी सटीक जानकारी के बावजूद इनकी धर-पकड़ का न होना बताता है कि सरकार की मशीनरी कितनी खरामा-खरामा चल रही थी। तौहीद जमात के संपर्क आइसिस से रहे हैं, यह सुनिश्चित करने के बाद सरकार की ओर से वक्तव्य जारी किया गया। अधिकारियों ने ऐसे कई संदर्भ दिये, जब श्रीलंका के भटके युवा सीरिया और इराक में आइसिस के वास्ते लड़ने गये थे।

मगर, यह कैसे मान लें कि पाकिस्तान, श्रीलंका के रेडिकलाइजेशन में कहीं नहीं रहा है? इससे इंकार नहीं कर सकते कि यहां पर सऊदी अरब और पाकिस्तानी जमाते इस्लामी की वजह से वहाबी विचारधारा को खाद पानी मिलता रहा है। कोलंबों के वाजीरगन्ना मावथा में बाकायदा जमाते इस्लामी पाकिस्तान ने अपना क्षेत्रीय मुख्यालय बना रखा है। साल 2014 में 18 लाख से अधिक श्रीलंकाई विदेशों में नौकरी कर रहे थे, उनमें से साढ़े चार लाख लोग केवल सऊदी अरब में थे।

भारत की घेराबंदी की ख्वाहिश

श्रीलंका के कट्टनकुडी को ‘मिनी सऊदी अरब’ कहा जाता है, जहां अरबी में लिखे साइन बोर्ड भी नुमायां होते हैं। कट्टनकुडी नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) का अधिकेंद्र रहा है, जिसके बारे में बताया गया कि यहीं के मानव बमों ने सीरियल विस्फोट किये थे। उन दिनों जांच-पड़ताल में काफी सारे श्रीलंकाई मुसलमानों को परेशान किया गया, मगर यह पाकिस्तान की चिंता का कारण नहीं बना। यहीं पर पता चलता है कि पाकिस्तान, दीन और कौम की कूटनीतिक मैच फिक्सिंग कैसे करता है।

दरअसल, पाकिस्तान, चीन की तरह बरास्ते श्रीलंका भारत की घेरेबंदी का ख्वाहिशमंद रहा है। उसे श्रीलंका के करीब जाने का अवसर गोटाबाया के समय ही मिला था, जब वे श्रीलंका के प्रतिरक्षामंत्री थे और लिट्टे के सफाये की तैयारी चरम पर चल रही थी। मई 2000 में जनरल मुशर्रफ के समय श्रीलंका को बड़े पैमाने पर पाकिस्तान ने हथियार भेजे थे। 2008 में 10 अरब डॉलर के 22 अल खालिद एमबीटी पाकिस्तान ने श्रीलंका निर्यात किये थे। आसिफ अली जरदारी के समय भी सैन्य सहयोग का सिलसिला जारी था। 16 जनवरी 2018 को पाक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा कोलंबो आयेे थे। यह सारा कुछ बताता है कि श्रीलंका का पाकिस्तान से पेइचिंग तक का प्रेम प्रगाढ़ हुआ है। इस व्यूह को तोड़ना एक बड़ी चुनौती है।

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