Thu. Mar 4th, 2021

Desh Pran

Hindi Daily

स्वदेशी 118 अर्जुन मार्क-1ए टैंक के ऑर्डर का रास्ता साफ

1 min read

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक के खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री मोदी ने 14 फरवरी को तमिलनाडु में सेना प्रमुख नरवणे को सौंपा था पहला टैंक

नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने मंगलवार को 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक के खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी, जिसमें 118 स्वदेशी अर्जुन मार्क-1ए टैंक शामिल हैं।

अर्जुन मार्क-1 ए टैंक के लिए 8379 करोड़ रुपये का ऑर्डर ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) के हैवी व्हीकल फैक्टरी, अवाडी (तमिलनाडु) को दिया जाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 फरवरी को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को पहला टैंक सौंपा था। इसके अलावा 5300 करोड़ से भारतीय सेना के लिए 820 बख्तरबंद वाहन खरीदे जाने हैं।

अर्जुन टैंक को डीआरडीओ के कॉम्बैट व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (सीवीआरडीई) ने डिजाइन किया है। टैंक का निर्माण अवाडी (तमिलनाडु) स्थित ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) के हैवी व्हीकल फैक्टरी में किया जाएगा। सरकार से अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के 30 महीनों के भीतर पांच एमबीटी का पहला बैच सेना को सौंप दिया जाएगा। अर्जुन युद्धक टैंक पूरी तरह से स्वदेश निर्मित है, जिसे पहली बार 2004 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था।

मौजूदा समय में सेना के पास अर्जुन टैंक की दो रेजिमेंट हैं, जिन्हें जैसलमेर में भारत-पाकिस्तान की सीमा पर तैनात किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी जब नवम्बर में सैनिकों के साथ दिवाली मनाने पाकिस्तान से लगी जैसलमेर (राजस्थान) के लोंगेवाला सीमा पर गए थे तो उन्होंने जिस अर्जुन टैंक की सवारी की थी, उसी का यह उन्नत संस्करण एमके-1ए है।

रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण समिति (डीएसी) ने 2014 में 118 अर्जुन एमके-1ए टैंकों के लिए 6,600 करोड़ रुपये के ऑर्डर को मंजूरी दी थी लेकिन यह परियोजना इसलिए अधर में थी, क्योंकि सेना ने रूसी टी-90 टैंकों के ऑर्डर देने पर ध्यान केंद्रित किया था। इसके बाद 2019 में सेना ने रूस को 464 टी-90 के लिए करीब 14 हजार करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया भी था।

2012 में विकसित किये गए अर्जुन मार्क-2 को 2018 में अर्जुन मार्क-1ए नाम दिया गया था। अर्जुन टैंक का इस्तेमाल करने के दौरान सेना को कई तरह के अनुभव हासिल हुए। इनके आधार पर सेना ने इसके उन्नत वर्जन के लिए कुल 72 तरह के सुधारों की मांग की।

डीआरडीओ ने सेना के सुझावों को शामिल करते हुए हंटर किलर टैंक तैयार किया। मार्च, 2020 में पोकरण में किए गए परीक्षणों में यह पूरी तरह खरा उतरा, जिसके बाद टैंक खरीदने का ऑर्डर भी तैयार कर लिया गया लेकिन सेना ने इस टैंक में कुछ और सुधार की मांग की थी।

इसके बाद डीआरडीओ ने करीब 14 नए फीचर्स को टैंक में शामिल करके 4 टैंक तैयार किए। इसके बाद भारतीय सेना और डीआरडीओ ने संयुक्त रूप से पिछले माह पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में पूरी तरह से स्वदेशी उन्नत युद्धक टैंक अर्जुन मार्क-1ए का परीक्षण किया।

इस दौरान सैन्य विशेषज्ञों के साथ डीआरडीओ में इसे तैयार करने वाले विशेषज्ञ भी मौजूद थे। उन्नत संस्करण अर्जुन मार्क-1ए ने 2020 में सभी परीक्षण पूरे कर लिए थे लेकिन सरकार से मंजूरी मिलने का इंतजार था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 14 फरवरी को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी की मौजूदगी में पहला अर्जुन मार्क-1ए मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) सौंपा, तभी उत्पादन के लिए औपचारिक आदेश देने का रास्ता साफ हो गया था।

डीआरडीओ ने किये हैं 72 अपग्रेडेशन

अपग्रेडेशन के बाद डीआरडीओ का दावा है कि इतने सुधारों के बाद यह टैंक अपने आप में परिपूर्ण है और दुनिया के किसी भी बेहतरीन टैंक से किसी मायने में कम नहीं है। अर्जुन एमके-1ए में पिछले मॉडल अर्जुन मार्क-1 टैंक के मुकाबले कुल 72 अपग्रेडेशन किए गए हैं, जिसमें 14 महत्वपूर्ण और 58 सूक्ष्म सुधार शामिल हैं।

डीआरडीओ के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि अब कुल 118 नए टैंक बनाए जाएंगे। भारतीय सेना अब इस टैंक की दो और रेजीमेंट बनाने वाली है जो अगले छह महीनों में सेना में शामिल कर ली जाएंंगी। प्रत्येक रेजीमेंट में 59 अर्जुन टैंक होंगे। 16 साल पहले सेना में शामिल किए गए 124 ‘अर्जुनों’ की तुलना में मार्क-1ए टैंक में बेहतर मारक क्षमता, गतिशीलता और सुरक्षा है।

अर्जुन मार्क-1ए टैंक की खासियत

नए उन्नत वर्जन में इसकी फायर पावर क्षमता को काफी बढ़ाया गया है। साथ ही इसमें एकदम नई तकनीक का ट्रांसमिशन सिस्टम लगाया गया है। यह टैंक अपने लक्ष्य को स्वयं तलाश करने में सक्षम है। यह स्वयं तेजी से आगे बढ़ते हुए दुश्मन के लगातार हिलने वाले लक्ष्यों पर भी सटीक प्रहार कर सकता है।

टैंक में कमांडर, गनर, लोडर व चालक का क्रू होगा। इन चारों को यह टैंक युद्ध के दौरान भी पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करेगा। टैंक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि रणक्षेत्र में बिछाई गई माइंस को साफ करते हुए आसानी से आगे बढ़ सकता है। कंधे से छोड़ी जाने वाले एंटी टैंक ग्रेनेड और मिसाइल का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

इसके अलावा केमिकल अटैक से बचाने के लिए इसमें विशेष तरह के सेंसर लगे हैं। केमिकल या परमाणु बम के विस्फोट की स्थिति में इसमें लगा अलार्म बज उठेगा। साथ ही टैंक के अंदर हवा का दबाव बढ़ जाएगा ताकि बाहर की हवा अंदर प्रवेश न कर सके। क्रू मेंबर के लिए ऑक्सीजन के लिए बेहतरीन फिल्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा इसमें कई नए फीचर्स शामिल किए गए हैं, जो इस टैंक को न केवल बेहद मजबूत बनाते हैं बल्कि सटीक प्रहार करने में इसका कोई सानी नहीं है।

shares
error

Enjoy this blog? Please spread the word :)