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अब बिल्डर छिपा नहीं पायेंगे अपनी कमाई

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निबंधित डीड के डाटा बेस में जीएसटीआइएन का उल्लेख किया गया अनिवार्य

राणा गौतम\विपीन कुमार  15.05.2019

रांची : झारखंड के बिल्डर अब अपनी कमाई सरकार की नजरों से छिपा नहीं सकते। बिल्डरों के निबंधित डीड के डाटा बेस में राज्य सरकार ने जीएसटीआइएन का उल्लेख करना अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में सर्कुलर जारी कर दिया गया है। इसकी सूचना सभी जिला अवर निबंधकों के पास राजस्व विभाग के सहायक निबंधन महानिरीक्षक अविनाश कुमार ने पत्र भेजकर दी है। इससे पहले वाणिज्य कर विभाग के सचिव सह आयुक्त प्रशांत कुमार ने इस सिलसिले में राजस्व, भूमि सुधार और निबंधन विभाग के सचिव केके सोन को जीएसटीआइएन का उल्लेख निबंधत डीड के डाटा बेस में करने का अनुरोध किया था।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने दिया था सुझाव

कर संग्रहण को लेकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से राज्य सरकार के कुछ विभागों के साथ बैठक हुई थी। इसमें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने वाणिज्यकर विभाग के अफसरों को ऐसा करने का सुझाव दिया था। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का यह मानना है कि बिल्डरों के निबंधित डीड के डाटा बेस में जीएसटीआइएन का उल्लेख अनिवार्य कर देने से माल और सेवा कर का भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा। साथ ही प्रत्येक बिल्डर या फिर रियल इस्टेट से जुड़े कारोबारियों की सम्पत्ति के आकलन में सहुलियत होगी।

राज्य गठन के बाद विभिन्न शहरों में बड़े पैमाने पर बिल्डरों द्वारा फ्लैटों-अपार्टमेंटों का निर्माण किया गया है। गत एक जुलाई 2017 से राज्य में माल और सेवा कर प्रणाली लागू कर दिया गया है। इसके तहत बिल्डरों द्वारा निर्मित फ्लैटों के प्रथम विक्रय अथवा निबंधन के समय बिल्डरों द्वारा सेवा कर का भुगतान करना आवश्यक कर दिया गया है। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर बिल्डरों की ओर से माल एवं सेवा कर का भुगतान नहीं किया जा रहा था। इसपर अंकुश लगाने के लिए ही अब निबंधित डीड के डाटा बेस में जीएसटीआइएन का उल्लेख अनिवार्य किया जा रहा है।

क्या है जीएसटीआइए

जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने पर किसी भी कारोबारी को उसका एक यूनिक पहचान नंबर मिलता है, जिसे जीएसटीआइएन कहा जाता है। बोलचाल की भाषा में इसे जीएसटी एकाउंट कहा जाता है। जीएसटीआइएन का हर डिजीट अलग-अलग पहचान कराता है। यह पूरे टैक्स सिस्टम को पारदर्शी, विश्वसनीय और ज्यादा परिणामदायी बनाता है।

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