Tue. Oct 27th, 2020

भाजपा प्रत्याशियों से नीतीश कुमार की दूरी राजग में चर्चा का विषय बना

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गया : जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने चुनाव प्रचार में भाजपा प्रत्याशियों से दूरी बनाए हुए हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार और सुशील मोदी की जोड़ी ने एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए दिन-रात एक कर रखा था। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी ने गया में दो-दो चुनावी सभा को संबोधित किया लेकिन नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी ने एक-दूसरे के दल से दूरी बनाए रखी।इस बात को लेकर राजग खेमे के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता काफी परेशान हैं।

भाजपा नेता सुशील मोदी ने गया में वजीरगंज और गुरुआ विधानसभा चुनाव क्षेत्र में चुनावी सभा को संबोधित किया। दोनों स्थानों पर भाजपा प्रत्याशी राजग उम्मीदवार हैं। नीतीश कुमार ने शुक्रवार को इमामगंज (सु.) और बेलागंज विधानसभा चुनाव क्षेत्र में चुनावी सभा को संबोधित किया। पूर्व मुख्यमंत्री सह हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी इमामगंज से राजग प्रत्याशी हैं।

लोजपा से शोभा सिन्हा इमामगंज से पार्टी प्रत्याशी हैंं। शोभा सिन्हा पूर्व जिला पर्षद अध्यक्ष और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री रही हैंं। इसी तरह जदयू प्रत्याशी अभय कुशवाहा बेलागंज से चुनाव लड़ रहे हैं जहां से लोजपा ने प्रतिबंधित रणवीर सेना के पूर्व जोनल कमांडर पुणदेव शर्मा को पार्टी प्रत्याशी बनाया है। शोभा सिन्हा और पुणदेव शर्मा हम और जदयू के साथ चुनावी समर को त्रिकोणीय बनाने की माद्दा रखते हैं।

गया जिले की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर स्थानीय स्तर पर भाजपा- जदयू और हम पार्टी के नेताओं के बीच जो एकजुटता होनी चाहिए थी वह नज़र नहीं आ रही है। हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के साथ इलाके के भाजपा के नेता और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की टोली चुनाव प्रचार में नहीं नजर आ रही है। यही स्थिति बेलागंज में जदयू प्रत्याशी अभय कुशवाहा की है। गया जिले में लोजपा को लेकर स्थानीय स्तर पर एनडीए की एकजुटता में बिखराव से नेतृत्व अनजान नहीं है।

भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को गया में और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा और अन्य नेता लगातार एनडीए में एकजुटता को लेकर बयान दे रहे हैं।

जदयू के कई वरिष्ठ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सब ठीक-ठाक नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभा नहीं कर रहे हैं। सुशील मोदी के साथ संयुक्त चुनावी सभा न होने से भी कार्यकर्ताओं के बीच ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है।

जदयू के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो एकाध दिनों में यदि हालत यही रहा तो इसका असर चुनाव पर पड़ना तय है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार को बेलागंज में थे।हम पार्टी के टिकारी से प्रत्याशी पूर्व मंत्री अनिल कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से टिकारी विधान सभा चुनाव क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने के लिए आग्रह करते रहे। मगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बेलागंज की चुनावी सभा से अनिल कुमार को विजय बनाने की अपील कर चले गए जो एनडीए कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चर्चा और बहस का मुद्दा बन गया।

दूसरी ओर, भाजपा के वैसे समर्पित कार्यकर्ता जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कार्यशैली से नाराज़ हैं खुलकर लोजपा के साथ प्रचार मैदान में उतर आए हैं। ऐसे कार्यकर्ता लोजपा को एनडीए का अटूट हिस्सा मानते हैं।उनका कहना है कि चिराग पासवान स्वयं कह चुके हैं कि वे नरेंद्र मोदी के हनुमान हैंं। लोजपा ने भाजपा के ही कई बड़े नेताओं को टिकट दिया है। ऐसे में केंद्र सरकार में एनडीए का घटक दल लोजपा के भाजपा के नेताओं की जीत सुनिश्चित कराने में कोई बुराई नहीं है। गया में एनडीए के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भले ही दिल मिले या नहीं गले मिलने से परहेज़ नहीं कर रहे हैं मगर चुनाव में उनकी नाराजगी मायने रखती है।

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