April 18, 2021

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क्रातिकारियों की जीवनी से छेड़छाड़

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राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए वीर सावरकर को अंग्रेजों से माफी मांगने वाला बताया है। इससे पहले पाठ्यक्रम में उन्हें वीर, महान, क्रांतिकारी व देशभक्त जैसे शब्दों से नवाजा गया था।

योगेश कुमार सोनी; 17.05.2019

राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए वीर सावरकर को अंग्रेजों से माफी मांगने वाला बताया है। इससे पहले पाठ्यक्रम में उन्हें वीर, महान, क्रांतिकारी व देशभक्त जैसे शब्दों से नवाजा गया था। राजस्थान के शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह दोतसारा का कहना है कि पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया गया था। उसी के प्रस्तावों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार हुआ है। ऐसी घटनाओं से एक बात तो तय हो चुकी है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी एक-दूसरे को नीचा दिखाने में पीछे नहीं हट रही। इस बार के लोकसभा चुनाव में मर्यादा तार-तार होती दिखी। बेहद शर्मनाक, घटिया व तथ्यहीन बयान सुनने को मिले। साथ में इतिहास के साथ छेड़छाड़ व फर्जी खबरों से भी लोकतंत्र को हिलाने का प्रयास लगातार जारी है। लेकिन हद तो तब हो गयी जब देश के इतिहासकारों और क्रांतिकारियों की जीवनी के साथ छेड़छाड़ की गयी।

सरकारी पैनल न हो
हमें लगता है कि स्कूलों की पाठ्य-सामग्रियों में बदलाव के लिये जो पैनल नियुक्त हो, वे किसी सरकार के अंतर्गत नहीं हो क्योंकि यदि सरकारें बदलती रहेंगी तो एक-दूसरे के प्रति कुंठा निकालने के लिए वे इतिहास के साथ छेड़छाड़ करती रहेंगी जिससे बच्चे भ्रमित होते रहेंगे और वे सच को कभी जान ही नहीं पाएंगे। जहां तक वीर सावरकर का सवाल है। वे 1911 से 1921 तक अंडमान जेल में रहे। 1921 में वे स्वदेश लौटे और फिर 3 साल जेल में रहे थे। जेल में उन्होंने हिन्दुत्व पर शोध ग्रंथ लिखा। 1937 में वे हिन्दू महासभा के अध्यक्ष चुने गए। 1943 के बाद वे दादर, मुंबई में रहे।

9 अक्टूबर 1942 को भारत की स्वतंत्रता के लिए चर्चिल को समुद्री तार भेजा और आजीवन अखंड भारत के पक्षधर रहे। यह बात सच है कि आजादी के माध्यमों के बारे में गांधीजी और सावरकर का नजरिया अलग-अलग था। लेकिन वीर सावरकर विश्वभर के क्रांतिकारियों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। वे एक महान क्रांतिकारी, इतिहासकार, समाज सुधारक, विचारक, चिंतक, साहित्यकार थे। उनकी पुस्तकों को क्रांतिकारी गीता के समान समझते थे। तमिलनाडु में चुनाव प्रचार करते हुए फिल्म अभिनेता कमल हासन ने कहा कि नाथूराम गोडसे आजाद भारत का पहला आतंकवादी हिंदू था। यदि कमल हासन को गोड़से के बारे में कुछ कहना ही था तो उसे हत्यारा कह सकते थे। गोडसे को आतंकवादी कहने का कोई आधार व तथ्य समझ में नहीं आया। खासकर मुस्लिम बाहुल्य इलाके में हिन्दू आतंकवादी कहने से स्पष्ट हो जाता है कि कमल हासन देश को बांटने वाली राजनीति कर रहे हैं।

हिन्दू आतंकवाद
कुछ वर्ष पहले हिन्दू आतंकवाद शब्द का प्रयोग कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने किया था। इस बार के चुनाव में उन्हें इसका जवाब देते न बना। भाजपा इस शब्द को भुनाती रही। इसके साथ ही यह घटिया राजनीति का सबसे सटीक उदाहरण भी बन गया। अब यदि हम ऐसे बयानों की समीक्षा करें तो आज इस तरह की बातों का क्या अर्थ है? क्या अब पार्टियों व नेताओं के पास मुद्दे खत्म हो गए? ऐसे लोग देश की सुरक्षा और तरक्की की बातें क्यों नहीं कर पा रहे हैं? अब तो यह लोग उन बातों पर राजनीति कर रहे हैं जिनका इस डिजिटल युग में कोई लेना-देना नहीं है। नेता अपने भाषणों के दौरान तमाम ऐसे मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं जिनकी जनता को जरूरत है लेकिन वो ऐसी कोई बात नहीं करते जिससे देश का भला हो। पाठ्य-पुस्तकों के साथ छेड़-छाड़ भी इसी दृष्टि का नतीजा है।

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