Sat. Jul 4th, 2020

कमर्शियल माइनिंग के खिलाफ वामदलों का 2 जुलाई को सभी जिलों में धरना प्रदर्शन

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रांची : वामदलों ने कमर्शियल माइनिंग के खिलाफ आगामी 2 जुलाई को सभी जिलों में धरना प्रदर्शन और 30 जून को पूरे राज्य में हूल दिवस मनाएगा। रविवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) कार्यालय में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता राज्य सचिव भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मजदूर संगठनों के आह्वान पर 2 से 4 जुलाई के हड़ताल को वामदल समर्थन करेंगे।

साथ ही 2 जुलाई को राज्य के सभी जिलों में केंद्र सरकार की कमर्शियल माइनिंग के विरोध में धरना प्रदर्शन ,प्रतिरोध मार्च का आयोजन किया जाएगा। 7 जुलाई को रांची में वामदलों के साथ साथ राजग को छोड़कर सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को एकजुट करने के उद्देश्य से बैठक आयोजित की जायेगी।

मेहता ने कहा कि कॉमर्शियल माइनिंग पर रोक के लिए हेमंत सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दायर किए जाने की कार्रवाई का वामदलों ने स्वागत किया है।

हेमंत सरकार का यह निर्णय केन्द्र सरकार के संरक्षण मे कार्पोरेट घरानों द्वारा राज्य की खनिज संपदा समेत यहां के जल-जंगल और जमीन की लूट को रोकने की दिशा में एक मजबूत कदम है । वामदल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस जनपक्षीय फैसले के साथ है।

उन्होंने कहा कि वामदलों का मानना है कि झारखण्ड संविधान की 5 वीं अनुसूची के तहत आदिवासी विशिष्टता को संरक्षित रखने के प्रति संवैधानिक दायित्व से आच्छादित राज्य है।वाणिज्यिक खनन से यहां के आदिवासियों के जीवन पर प्रतिकुल असर पड़ेगा । निजी खनन मे केवल मुनाफा केंद्रीत रहने के कारण अवैज्ञानिक खनन की प्रक्रिया का खामियाजा भी आदिवासियों और अन्य गरीबों को भूगतना पडेगा। इसके अलावा पर्यावरणीय संतुलन, वनों का संरक्षण जैसे आवश्यक कार्यों पर भी वाणिज्यिक खनन का विपरीत प्रभाव पडेगा , इसलिए वामदल शुरू से ही कमर्शियल माइनिंग का विरोध करते आ रहें हैं। जल, जंगल, जमीन और खनिज हमारी राष्ट्रीय संपदा को बचाने का संघर्ष अब एक नए दौर मे पहुंच गया है। क्योंकि कोयले के वाणिज्यिक खनन के बहाने केंद्र सरकार कृषि, वन, पर्यावरण सभी कुछ कार्पोरेट घरानों के हवाले करने पर तूली हुईं है।

उन्होंने कहा कि कोयला मजदूरों ने देश की संपत्ति को बचाने के लिए जो देशभक्ति पूर्ण संघर्ष छेड़ा है। उससे कार्पोरेट परस्त ताकतें बौखला गई हैं। और अब इसकी कमान खुद नरेंद्र मोदी ने संभाल ली है और 18 जून को कमर्शियल माइनिंग की निलामी मे स्वयं मौजूद रहकर उन्होंने इसका एलान भी कर दिया है । देश का मजदूर वर्ग अपने प्रधानमंत्री के इस कदम से आक्रोशित है। क्योंकि जिस कमर्शियल माइनिंग की निलामी की कोशिश को कोयला कामगारों ने अपनी एकता और संघर्ष से पांच बार विफल कर दिया।

उसके खिलाफ अब मोर्चा स्वयं प्रधानमंत्री ने संभाल लिया है। अब इस परिस्थिति में कोयला कामगारों की एकजुटता और संघर्ष से ही इससे निपटा जा सकता है। आगामी 2 से4 जुलाई तक कोयला कामगारों की होने वाली तीन दिवसीय संयुक्त हड़ताल केंद्र सरकार की जन विरोधी और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आर – पार के संघर्ष का प्रस्थान विंदु होगा।

वामदल कोयला कामगारों के इस संघर्ष का समर्थन करते हुए अपनी तमाम इकाइयों का आह्वान करते हैं कि कोयला मजदूरों के इस संयुक्त तीन दिवसीय हड़ताल के समर्थन मे आगामी 2 जुलाई को सभी जिलों में धरना प्रदर्शन और 30 जून को पूरे राज्य में हूल दिवस मनाये।

बैठक में भाकपा माले के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद, सीपीआईएम के सचिव मंडल के सदस्य प्रकाश विप्लव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सहायक सचिव महेंद्र पाठक ,मासस के नेता सुशांतो मुखर्जी और अजय सिंह मौजूद थे।

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