Wed. May 27th, 2020

एक्ट्रेस नहीं बनती तो पालीटिशियन बनती – सारा अली खान

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“सैफ अली खान और अमृता सिंह की खूबसूरत बेटी सारा अली खान ने ‘केदारनाथ’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया और उनकी दूसरी फिल्म ‘सिंबा’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल ही मचा दिया। सिर्फ दो फिल्मों के साथ ही सारा की फैन फालोइंग अचानक काफी बढ़ गयी। वह बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो चुकी हैं। पाकिस्तान के यूथ में सारा बहुत ज्यादा पॉपुलर हैं। वहां इंटरनेट पर उन्हें सबसे ज्यादा सर्च किया जाता है। सारा अली खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। सारा अली खान ने काफी कम समय में इंडस्ट्री में पहचान स्थापित कर ली है। फैस को उनकी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार रहता है। उनके सितारे बुलंदियों पर हैं। उनकी झोली में एक के बाद एक बड़े डायरेक्टर्स की फिल्में आ रही हैं। प्रस्तुत हैं सारा अली खान के साथ की गई बातचीत के मुख्य अंश-“

सुभाष शिरढोनकर

सवाल : दिशा पटानी, अनन्या पांडे, जाह्नवी कपूर और तारा सुतारिया के साथ अक्सर आपकी तुलना की जाती है। आपको इस पर किस तरह की फीलिंग्स होती है?

जवाब : हम सभी अलग हैं। हमारे पास काम भी अलग अलग होता है। ऐसे मेंं किसी कंपेरिजन का कोई अर्थ नहीं है। वैसे भी मेरा सारा फोकस हमेशा काम पर होता है, इसलिए मैं कभी किसी के साथ कंपेरिजन फील ही नहीं करती। मेरी सारी कोशिश सिर्फ अपना बेस्ट देने के लिए होती है।

सवाल : सिर्फ दो फिल्मों के साथ आपकी फैन फालोइंग काफी बढ़ चुकी है। आप एक सेलिब्रिटी बन चुकी हैं। इस लोकप्रियता को कैसे व्यक्त करेंगी?
जवाब : मुझे लगता है कि मैं एक आम लडकी से बहुत खास हो चुकी हूं लेकिन पर्सनली इस पॉपुलेरिटी के बाद मैं बिलकुल नहीं बदली हूं। मैं आज भी पहले जैसी हूं। इस पापुलेरिटी को पाकर मैं खुश तो बहुत हूं लेकिन बतौर एक्ट्रेस खुद को अभी इंप्रूव करने पर फोकस कर रही हूं।

सवाल : आप अपने फैंस के साथ दिल खोलकर मिलना पसंद करती हैं। आपका मिजाज अब आपके लिए खतरे का सबब बनता जा रहा है?
जवाब : मुझे लोगों से बात करना अच्छा लगता है। जब छोटी थी और मम्मी डैडी के साथ घूमने जाती थी, अनजान लोगों के साथ दोस्ती कर लेती थी। मेरा आज भी वही रवैया है। हर कलाकार के कुछ फैन जरूरत से ज्यादा क्रेजी होते हैं लेकिन उन की वजह से मैं अपने आपको नहीं बदल सकती।
सवाल : आपने कोलंबिया विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है। उस शिक्षा का आपके एक्टिंग करियर में क्या योगदान रहा?

जवाब : मैं वहां इसलिए गयी क्योंकि पढ़ लिखकर मैं कुछ बनना चाहती थी। तब एक्ट्रेस बनने की बात मेरे मन में कहीं नहीं थी। वहां की पढ़ाई का बेशक मेरी एक्टिंग से कोई सीधा ताल्लुक न हो। लेकिन पढ़ाई-लिखाई कभी बेकार नहीं जाता। वहां जाकर मैंने सीखा कि कैसे हम जीवन में फ्री होकर काम कर सकते हैं। वहां जाकर मैंने जिस तरह के अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त किये, वे अब मेरी निजी जिंदगी में बेहद काम आ रहे हैं। उसकी वजह से मुझे खुद को पहचानने में काफी मदद मिली।

सवाल : उस वक्त आपने क्या बनने का सपना देख रखा था?
जवाब : यदि मैं एक्टिंग की दुनिया में नहीं आती, तब शायद लॉयर या पॉलीटिशियन बनती। मेरी नानी भी एक पॉलीटिशियन रही हैं। मैं खुद भी इंदिरा गांधी जी से काफी इंप्रेस रही हूं। इसलिए शायद एक पॉलीटिशियन ही बनती। मुझे लगता है कि अभी भी ज्यादा देर नहीं हुई है। कुछ वक्त यहां बिताकर मैं कभी भी पॉलिटिक्स में जा सकती हूं।

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