Thu. Aug 13th, 2020

हाई कोर्ट को गौतम नवलखा की अंतरिम जमानत पर सुनवाई का अधिकार नहीं, सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले के आरोपी गौतम नवलखा की अंतरिम जमानत पर सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट को गौतम नवलखा की अंतरिम जमानत पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए थी क्योंकि ये केस बांबे हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में आता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से एनआए पर की गई टिप्पणी को भी हटाने का आदेश दिया। दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले 28 मई को गौतम नवलखा की अंतरिम जमानत पर सुनवाई करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया ये लगता है कि एनआईए ने गौतम नवलखा को दिल्ली से मुंबई ले जाने के लिए जल्दबाजी दिखाई। हाईकोर्ट ने एनआईए को सभी दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया था।

पिछले 2 जून को सुप्रीम कोर्ट ने गौतम नवलखा को नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि हाईकोर्ट ने ये आदेश अपने क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर दिया है। पिछले 29 मई को हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा को प्रोडक्शन वारंट पर मुंबई ले जाने की पूरी कार्यवाही की प्रति दाखिल करने का निर्देश दिया था ।

पिछले 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे की सरेंडर करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया था। उसके बाद गौतम नवलखा ने दिल्ली में सरेंडर कर दिया था। 1 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव की दो सौंवीं सालगिरह पर हुए कार्यक्रम में हिंसा हुई थी। उसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस ने 162 लोगों के खिलाफ 58 केस दर्ज किए हैं।

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