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नाकामी : हटिया इलाके में अपराधी बेलगाम-रांची पुलिस नहीं कर पा रही कंट्रोल

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14 मई, 2019

रांची : राजधानी रांची के हटिया इलाके में हाल के दिनों में आपराधिक वारदातें बढ़ी हैं। पिछले कुछ महीनों में हटिया क्षेत्र में लगातार कई घटनाएं हुई हैं। लेकिन, कई मामलों में अब तक अनुसंधान अधुरा है। पुलिस नए मामलों में उलझ जाती है और पुराने मामलों का अनुसंधान धीमा पड़ जाता है। कई मामले ऐसे हैं, जिनके खुलासे के बाद भी अपराधी गिरफ्त से बाहर हैं। कुछ गिने-चुने मामलों में अपराधी गिरफ्त में आ गए, लेकिन उसके बाद अब तक अनुसंधान अपने नतीजे पर नहीं पहुंचा। हटिया इलाके के धुर्वा, जगन्नाथपुर, पुंदाग, अरगोड़ा, डोरंडा और तुपुदाना ओपी आते हैं। हटिया क्षेत्र में हुई हत्या की घटनाओं के खुलासा के लिए सीनियर पुलिस अधिकारियों ने भी निर्देश दिया था, लेकिन पुलिस हत्याकांड का खुलासा नहीं कर पायी।

वरीय अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद भी मामले का खुलासा नहीं
हटिया क्षेत्र में अपराधी बेखौफ घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस, अपराधियों के सामने बौनी बनी हुई है। टाइगर मोबाइल, पीसीआर वैन के अलावा बाइक दस्ते थाने की गश्ती भी अपराध रोकने में सक्षम नजर नहीं आ रहे हैं। आये दिन हटिया क्षेत्र में हो रही आपराधिक घटनाओं से ऐसा लगता है कि थानेदार के नियंत्रण में थाना क्षेत्र नहीं है। पूरे इलाके में सिर्फ खानापूर्ति के लिए गश्ती होती है। कई मामलों का खुलासा करने के लिए वरीय पुलिस अधिकारी ने एसआईटी का गठन किया।

एसआईटी में मौजूद पुलिसकर्मियों को दिशा-निर्देश देकर काम करने को भी कहा। मगर, इसके बावजूद मामले का खुलासा नहीं हो पाता है। अब एसएसपी स्वयं अपनी क्यूआरटी से हत्या जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त अपराधियों को दबोचने के प्रयास में लगे हुए हैं। इसके लिए फंड भी दिया जाता है। लेकिन अब मुखबिर काम करने से कतराते हैं। सूत्र बताते हैं कि पूर्व में मुखबिरों को जो सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती थीं, अब सब कुछ बंद हो गया है। इस कारण सूचना तंत्र कमजोर हो गया है, जिससे अपराध के खुलासे में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं थानों में अनसुलझे मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है।

एक झलक इन मामलों पर

  • 8 दिसंबर को डोरंडा थाना क्षेत्र के घाघरा में गोली मारकर युवक अमित टोपनो की हत्या कर घाघरा के नजदीक फेंक दिया गया। पुलिस ने शव दूसरे दिन बरामद किया, लेकिन अब तक अपराधियों का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
  • 28 दिसंबर को डोरंडा थाना क्षेत्र के बड़ा घाघरा में अपराधियों ने जमीन कारोबारी अरुण किस्पोट्टा की गोली मार कर हत्या कर दी। अपराधी अब भी पुलिस गिरफ्त से दूर है।
  • 8 जनवरी को डोरंडा थाना क्षेत्र के घाघरा में सामू उरांव की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। वहीं गोलीबारी में ग्रामसभा के सचिव शंकर सुरेश उरांव घायल हो गये थे। पुलिस का दावा है कि अपराधियों की पहचान कर ली गयी है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
  • 24 मार्च को जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के शहीद मैदान के पास नाले से संदीप दूबे का शव बरामद किया था। संदीप होली की शाम घर से निकले थे, जिसको लेकर सनहा दर्ज कराया गया था। ओबरिया मोड़ निवासी संदीप कुमार दूबे की हत्या कर विधानसभा के समीप नाले में फेंक दिया था। पुलिस किसी अपराधी की पहचान तक नहीं कर सकी है।
  • 16 अप्रैल को जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के धुर्वा शहीद मैदान के पास नाले से पुलिस ने एक युवती का शव बरामद किया था। युवती की हत्या की बात सामने आ चुकी है, लेकिन अभी तक शव की शिनाख्त नहीं हो पायी है।
  • 24 अप्रैल को जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के हटिया स्टेशन के पास संतोष कुमार नाम के व्यक्ति को बाइक सवार तीन अपराधियों ने गोली मारकर घायल कर दिया। पुलिस का दावा है कि अपराधियों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन अपराधी पुलिस गिरफ्त से बाहर है।
  • 27 अप्रैल को डोरंडा थाना क्षेत्र के डीबडीह के नजदीक सरना समिति के सदस्य प्रदीप तिर्की को स्कूटी सवार दो अपराधियों ने गोली मारी। गोली अंगुली में लगी थी। मामले को लेकर पुलिस अब तक आरोपी की पहचान नहीं कर सकी है।
  • 3 मई को धुर्वा थाना क्षेत्र में शालीमार बाजार के नजदीक से एक नाबालिग लड़की को अगवा कर 3 लोगों ने मौसीबाड़ी स्थित पुराने बस डीपो ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। धुर्वा पुलिस को लड़की सड़क पर रोती हुई मिली थी।
  • 6 मई डोरंडा थाना क्षेत्र के एजी कॉलोनी के पास सड़क किनारे पुलिसकर्मी परमानंद प्रधान का शव बरामद किया गया। पुलिस इसे अधिक नशे में मौत का कारण मान रही है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आया है कि उसकी हत्या रस्सी से गला दबाकर की गयी है। मई को अरगोड़ा थाना क्षेत्र के इमली चौक के पास मो. अहबाब की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। अहबाब वहां पर नशेड़ियों के बीच हो रहे विवाद को सुलझाने गया था।
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