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छठे चरण में सबसे कड़ी टक्कर दिग्विजय व प्रज्ञा के बीच भोपाल में, प्रचार के लिए यहां न मोदी आये और न राहुल

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कृष्णमोहन सिंह; 12.05.2019

नयी दिल्ली : सात राज्यों में 12 मई को जिन 59 लोकसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें सबसे कांटे की लड़ाई भोपाल संसदीय सीट पर है। जहां कांग्रेस के प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और भाजपा की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर हैं। इस ससंदीय सीट पर अपने प्रत्याशी के लिए प्रचार करने न तो भाजपा के सर्वोच्च नेता व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गये न ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। आजादी के बाद से 16 बार लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें से इस सीट पर 6 बार कांग्रेस, एक बार लोक दल, एक बार जनसंघ और 8 बार भाजपा जीती है। इस तरह इस सीट पर 9 बार संघ की आनुषांगिक राजनीतिक पार्टी जीती है। 1989 से यहां लगातार भाजपा ही जीत रही है। इसलिए इस सीट को भाजपा का गढ़ भी कहा जाने लगा है।

ऐसे में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को भाजपा के गढ़ में चुनाव जीतने के लिए भेजा गया है। इसीलिए कुछ लोग कहने भी लगे हैं कि कांग्रेस के उनके विरोधियों ने उनको भोपाल से जानबूझ कर लड़वाया है। ताकि यहां से हिन्दू बनाम मुसलमान में मतदाताओं के बंट जाने से वह चुनाव हार जायें। क्योंकि मध्यप्रदेश की भोपाल और इंदौर सीट ऐसी मानी जाती है जहां हिन्दू बनाम मुसलमान करके भाजपा आसानी से जीत जाती है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस पहले तो दिग्विजय को लोकसभा का टिकट देना नहीं चाहती थी।

क्योंकि सबको पता था कि इस बार यदि उनको उनके दबदबे वाले राजगढ़ संसदीय सीट से टिकट दिया गया होता, तो आसानी से जीत जायेंगे, लेकिन दिग्विजय ने जब यह कहा कि पार्टी मध्यप्रदेश के जिस भी लोकसभा सीट से चाहे टिकट दे, वहां से लड़ूंगा। उसके बाद उनको भोपाल संसदीय सीट पर प्रत्याशी बना दिया गया। लेकिन अपनी मेहनत व माइक्रो मैनेजमेंट के कारण उन्होंने यहां अपनी स्थिति बेहतर करके भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर को घेर लिया है।

इस बारे में मध्यप्रदेश के पूर्व विधायक राजेन्द्र तिवारी का कहना है कि राजा साहब (दिग्विजय सिंह) को यदि यहां से भाजपा प्रत्याशी का नाम घोषित करने के बाद टिकट दिया गया होता, तब ज्यादा संभावना थी कि भाजपा अपने निवर्तमान सांसद आलोक संजर को ही टिकट देती। ऐसे में राजासाहब आसानी से जीत जाते। उनका नाम पहले घोषित कर दिया गया, तो उनके सामने संजर कमजोर साबित हो रहे थे, तब भाजपा ने हिन्दुत्व की आंधी चलाने के लिए चर्चित साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को प्रत्याशी बना दिया। लेकिन दिग्विजय भी कम नहीं हैं। उन्होंने नर्वदा परिक्रमा करके राज्य के हिन्दुओं व साधु-संतों के बीच अपनी छवि बहुत अच्छी बना ली है। और उनके राजनीतिक गुरु अर्जुन सिंह रहे हैं, सो राजनीतिक में तो माहिर हैं ही। उन्होंने अपनी स्थिति बहुत मजबूत कर ली है। ऐसे -ऐसे दांव चले की संघ, विहिप व उसके समर्थक साधु बाबा लोग परेशान हो गये हैं।

मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश मेहरोत्रा का कहना है कि यहां का चुनाव सेकुलरिज्म बनाम कम्युनलिज्म करने की कोशिश हुई है। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने बहुत ही जमीनी स्तर पर मेहनत करके चीजें मैनेज की हैं। और उनको सबसे अधिक फायदा मिल सकता है भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर का पार्टी में ही अंदर-अंदर हो रहे विरोध का। उमा भारती गुट और शिवराज गुट मन से सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। केवल संघ लगा हुआ है। शिवराज और उमाभारती दोनों को ही लग रहा है कि प्रज्ञा को भोपाल से प्रत्याशी बनाकर उन दोनों का कद कम करने की चाल चली गयी है। ऐसे में यदि प्रज्ञा जीत जाती हैं तब उनको केन्द्र में मंत्री बना दिया जायेगा। जिसके बाद वह भविष्य में मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री पद की दावेदार हो सकती है।

लेकिन अरेरा कालोनी के भाजपा कार्यकर्ता भरत का कहना है कि चाहे कोई कुछ भी कहे इस बार भी यह सीट भाजपा ही जीतेगी। चाहे जीत का मार्जिन भले ही कम हो जाये, लेकिन जीतेगी तो जरूर। इस सवाल पर कि क्या कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने लड़ाई कठिन कर दी है? भरत का कहना है, हां, उनके प्रत्याशी होने से लड़ाई बहुत कठिन हो गयी है। जीत बहुत आसान नहीं है। बहुत मेहनत करनी पड़ रही है, लेकिन भोपाल सीट हिन्दू बहुल है और यहां मुस्लिम के विरुद्ध जनता गोलबंद हो जाती है, इसलिए इस बार भी भाजपा प्रत्याशी जीत जायेगा। भरत का कहना है कि 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने कांग्रेस प्रत्याशी को 3,70,696 वोट से हराया था। इसलिए इस बार यदि भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा को वोट कुछ कम भी मिला, तब भी वह लगभग एक लाख वोट से तो जीत ही जायेंगी। भोपाल लोकसभा क्षेत्र के लगभग 20 लाख मतदाताओं में से लगभग 4 लाख मुसलमान, 3 लाख ब्राह्मण, 4.5 लाख पिछड़ा वर्ग, 2 लाख कायस्थ तथा 1 लाख के लगभग क्षत्रिय हैं।

अपने चुनाव की स्थित के बारे में दिग्विजय सिंह का कहना है कि वह चुनाव जीत रहे हैं, और कांग्रेस भोपाल लोकसभा सीट सहित, राज्य की लगभग 12 सीट जीत रही है। मालूम हो कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीट में से केवल दो सीट जीती थी।

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