Thu. Aug 13th, 2020

मानसिक बीमार और बेघरों का बगैर पहचान पत्र के हो कोरोना टेस्ट: हाई कोर्ट

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नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से पूछा है कि मानसिक रूप से बीमार और बेघर लोगों का पहचान पत्र के बिना कोरोना टेस्ट क्यों नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक हफ्ते में इसका जवाब देने का आदेश दिया है। मामले पर अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा कि वो इस बात पर विचार करें कि मानसिक बीमार और बेघर लोगों का पहचान पत्र के बिना कोरोना का टेस्ट किया जाए। कोर्ट ने पूछा कि किसी बेघर व्यक्ति से आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वो अपने आवास या पहचान का प्रमाण पत्र दिखा सके। आपने कई समूहों के लिए टेस्टिंग कैंप स्थापित किया है तो मानसिक रूप से बीमार और बेघर लोगों के लिए टेस्टिंग कैंप क्यों नहीं आयोजित किया जा सकता है?

पिछली 9 जुलाई को शाहदरा स्थित मानसिक आरोग्यशाला इहबास ने कहा था कि मानसिक रूप से बीमार और बेघर लोग कोरोना टेस्ट कराने से लेकर दूसरी चिकित्सा के हकदार हैं। इहबास ने कहा कि मानसिक रूप से बीमार बेघर लोगों को कोरोना के संक्रमण का खतरा उन लोगों से ज्यादा है जिनके सिर पर छत है। इहबास ने कहा कि उसके अस्पताल ने बेघर मानसिक लोगों का दूसरे अस्पतालों से ज्यादा इलाज किया है।

इहबास ने कहा था कि बेघर मानसिक लोगों के इलाज में सबसे बड़ी बाधा उनका फोटो पहचान पत्र या वैध मोबाइल नंबर नहीं होना है। इहबास ने कहा था कि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के मुताबिक फोटो पहचान पत्र या वैध मोबाइल नंबर का होना अनिवार्य है। इहबास ने कहा था कि मानसिक रूप से बीमार लोगों के साथ साफ-सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने में परेशानी होती है, जिसकी वजह से उन्हें इलाज के लिए भर्ती करना चुनौती भरा काम है।

इहबास की इस दलील के बाद कोर्ट ने आईसीएमआर ने नाराजगी जताई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और वकील गौरव कुमार बंसल ने कहा था कि आईसीएमआर के हलफनामे में साफ है कि वे बेघर मानसिक रूप से बीमार लोगों का इलाज करने में विफल हैं। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में मानसिक रूप से बीमार और बेघर लोगों का कोरोना टेस्ट करने के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं जारी किया गया है।

याचिकाकर्ता ने इसके पहले भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने पिछली 9 जून को दिल्ली के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे इस याचिका पर विचार करें। उसके बाद उन्होंने 13 जून को दिल्ली सरकार के समक्ष अपनी बातें रखी थीं लेकिन दिल्ली सरकार ने इस पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई।

याचिका में कहा गया है कि मानसिक रूप से बीमार लोग समाज में तिरस्कृत हैं। इस समुदाय को समाज और सरकार के सहयोग की आवश्यकता है। कोरोना के वर्तमान संकट में सरकार को भी मानसिक रूप से बीमार और बेघर लोगों को बचाने के लिए योजना बनाकर उसे लागू करना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि मेंटल हेल्थकेयर एक्ट की धारा 3(3) के मुताबिक मानसिक रूप से बीमार लोगों की देखभाल करना दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी है।

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