Sun. Sep 27th, 2020

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के दागी अधिकारियों पर की कड़ी कार्रवाई की तैयारी

रांची : झारखंड सरकार ने दागी अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंत्रिमंडलीय समन्वय विभाग से आरोपी अधिकारियों का पूरा ब्योरा देने के लिए कहा है। कैबिनेट सचिव को पत्र भेजकर पिछले पांच साल की पूरी फेहरिस्त तलब की है। कैबिनेट सचिव से तलब ब्योरे में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और राज्य प्रशासनिक सेवा के दागी अधिकारियों के बारे में कैडरवार ब्योरा देने के लिए कहा गया है। हालांकि, ब्योरा प्राप्त होने के बाद की प्रक्रिया में बारे में कुछ नहीं कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि इसके जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कड़ा कदम उठा सकते हैं। पिछले पांच साल में साढ़े चार साल रघुवर दास का कार्यकाल था। हेमंत सरकार का रघुवर राज के समय नौकरशाही में हो रही ग़ड़बड़ी से पर्दा उठाना भी मकसद हो सकता है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री के सामने कुछ दागी अधिकारियों के खिलाफ लंबे समय से लंबित कार्रवाई की चर्चा वरिष्ठ अधिकारियों ने की। इसके बारे में विस्तृत जनकारी किसी के पास नहीं थी। किसी भी विभाग के पास इस बारे में संकलित रिपोर्ट नहीं था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडलीय सचिव को पत्र लिख कर पूरी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया।

राज्य सरकार के सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमडलीय समन्वय विभाग को यह भी बताने के लिए कहा गया है कि कितने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति नहीं मिली। इसके अलावा पिछले पांच साल में कितने अधिकारियों के खिलाफ कारर्वाई हुई, इसके बारे में भी बताने के लिए कहा गया है। पूर्ववर्ती सरकार में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी के बारे में भी जानकारी मांगी गई है।

जांच के दायरे में आए अधिकारियों की जांच रिपोर्ट से भी अवगत कराने के लिए कहा गया है। इसी तरह विभिन्न एजेंसियों की जांच की मांग पूरी नहीं होने के बारे में भी सूचना मांगी गई है। मांगे गए विंदुंओं पर अद्यतन जानकारी देने के लिए कहा गया है। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट सचिव ने अपने विभाग के अधीन आने वाले निगरानी विभाग को रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही मुख्यमंत्री को उपलब्ध कराया जाएगा।

पिछले दो साल के अंदर कई ऐसे मामले उजागर हुए, जिसमें जांच रिपोर्ट को भी दबा दिया गया। दोषी अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। कई मामलों में लोकायुक्त के आदेश पर भी कार्रवाई नहीं हुई।

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