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भूषण स्टील मामले में बनेगा देश की अदालती प्रक्रिया का इतिहास! -70,000 पृष्ठों की चार्जशीट, 284 आरोपी

11.07.2019

मुंबई : भारत की अदालती प्रक्रिया में कई मामले चर्चा में आते हैं, लेकिन भूषण स्टील का मामला नया इतिहास गढ़ने वाला है। कंपनी की कथित गड़बड़ियों की जांच करते हुए सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) ने 70 हजार पन्नों की बेहद विस्तृत चार्जशीट में 284 लोगों और इकाइयों को आरोपी बनाया है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस विशाल चार्जशीट को देखते हुए अदालत को सभी आरोपियों की उपस्थिति दर्ज करने में (हर आरोपी पर एक मिनट) ही 4 घंटे 45 मिनट लग सकते हैं और सुनवाई ऐसी अदालत में करनी पड़ सकती है, जहां आरोपी और उनके वकील मिलाकर करीब 600 लोग (एक आरोपी पर एक वकील मानते हुए) आ सकते हों। साथ ही, जज को 70 हजार पन्ने में दर्ज सबूतों पर नजर दौड़ानी पड़ सकती है।

284 कॉपियां बनानी पड़ेंगी चार्जशीट की

भूषण स्टील मामले में कुछ आरोपियों की पैरवी कर रहे सीनियर वकील विजय अग्रवाल ने कहा, एजेंसी ने इतने ज्यादा आरोपियों के नाम डाले हैं कि हो सकता है कि मौजूदा वकीलों और आरोपियों के जीवन काल में सुनवाई पूरी न हो पाये। करीब 300 तो आरोपी ही हैं। ऐसे में सुनवाई कोर्ट रूम में नहीं हो सकती। सीआरपीसी के सेक्शन 207 के अनुसार हर आरोपी को चार्जशीट की हार्ड कॉपी देनी होती है। ऐसे में एजेंसी को दो करोड़ से ज्यादा पेज प्रिंट कराने होंगे।

गवाहों की संख्या से बढ़ी परेशानी

एसफआईओ का पक्ष देख रहे सीनियर वकील हितेन वेनागांवकर ने कहा, क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में आरोपियों के बजाय कोर्ट के सामने पेश होने वाले गवाहों के आधार पर सुनवाई होती है। गवाहों की संख्या ज्यादा न हो तो सुनवाई में ज्यादा समय नहीं लगता है।

मुंबई हमले में थी 10,000 पन्नों की चार्जशीट

इससे पहले आरोपियों की बड़ी संख्या वाला मामला 12 मार्च, 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार ढंग से हुए 12 बम धमाकों का था। उसी साल नवंबर में मुंबई पुलिस ने 10 हजार से ज्यादा पृष्ठों की चार्जशीट पेश की थी।