Wed. Feb 19th, 2020

कांटों की चुभन का अहसास कराता ‘बबूल’ कहानी संग्रह

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विजय केसरी

कहानीकार रतन वर्मा की दृष्टि की परिधि बड़ी व्यापक है। समाज के बदलते परिदृश्य, एक-दूसरे को मात देने की दौड़, परिवार के बनते बिगड़ते रिश्ते, वोट और सत्ता की स्वार्थ युक्त राजनीति पर वे चुप नहीं बैठते, बल्कि अपनी कहानियों के माध्यम से समाज में नव जागरण पैदा करते हैं। उनकी कहानियां यथार्थ की भूमि को स्पर्श करती नजर आती है। उन्होंने बबूल कहानी संग्रह में बारह कहानियों को स्थान दिया है। इस संग्रह की बबूल कहानी, गांव की एक युवती रैना के ईद-गिर्द घूमती है। रैना के जीवन संघर्ष और शोषण के खिलाफ कथाकार विशेष संवेदनशील दिखते हैं।

बबूल शीर्षक नामकरण के पीछे भी जीवन के झंझावातों के संघर्ष छुपे हैं। इस संग्रह की बारह कहानियों में जीवन के संघर्ष और झंझावातों की बातें शामिल है। सबकी अपनी-अपनी पीड़ा है। पीड़ा जैसी भी हो, तकलीफ देती है। बबूल को यहां कांटे के प्रतीक के रूप में इसलिए रखा गया है कि कांटे जैसे भी हो, जब शरीर में चुभते हैं तो कष्ट ही देते हैं। बबूल की नायिका रैना की जिंदगी को कांटों से तार-तार कर दिया जाता है। आखिर दर्द की भी एक सीमा होती है।

कब तक चुपचाप सहती रहती? जब रैना का विद्रोही स्वरूप बाहर आता है तो अपने पति की हत्या दरोगा से करवा देती है। वही दरोगा जब उसकी बेटी का शील हरण कर लेता है ए तो यह पीड़ा रैना के लिए असहनीय हो जाती है। फिर वह दरोगा की भी हत्या कर देती है। उसका पुरूष पर से विश्वास उठ चुका है। अगर उसका बस चले तो इस संसार को पुरुष विहीन ही कर दे।

आज समाज में जो लड़कियां असुरक्षित हैं, एक के बाद एक सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं घट रही है। जो क्रूरता की सारी हदें पार करती चली जा रही है,उसके खिलाफ रैना जोरदार आवाज लगाती है।
बबूल कहानी संग्रह की दूसरी कहानी ‘रिश्तों का गणित’ संबंधों के तार-तार होते रूप को व्यक्त करती नजर आती हैं। कहानी इतनी जीवंत प्रतीत होती है कि लगता है कि यह हमारे आसपास की ही घटना है।

‘साहब तो साहब ही है’, ‘घराना’, ‘हैप्पी क्रिसमस’, ‘मारिया’, ‘जूठन’, ‘वेतन का दिन’ ‘डाल से बिछड़ी सूरजमुखी’, ‘घोंचू’ ‘अपराजिता’,’मेरा सहयात्री’, ‘कबाब’, आदि कहानियां सामाजिक यथार्थ के धागों से बुनी गयी प्रभावोत्पादक कहानियां है, जिनमें में रिश्ते, बिछुड़न, संघर्ष, पराजय, अपराजय, पीड़ा और संघर्षरत लोगों के स्वर साफ सुनाई देते हैं। ये परिवर्तन की मांग करती है, जो परिस्थितियों से मुकाबला कर आगे बढ़ना चाहती है। हर एक कहानी अपनी बात कहने और आवाज उठाने में सफल होती नजर आती है।

रतन वर्मा के इस संग्रह में शामिल कहानियों की बुनावट ऐसी है कि अगर पाठक किसी एक कहानी को पढ़ने का मन बना ले तो उसे पूरा किए बिना नहीं छोड़ेगा। साथ ही उसे अगली कहानियां पढ़ने की इच्छा भी जाग जाएगी। इन कहानियों के माध्यम से लेखक पाठकों से समाज में मचे हलचल और उथल-पुथल को शांत करने की भी बात बताते हैं। लेखक यहां बदलाव की मांग भी करते नजर आते हैं । निश्चित तौर पर रतन वर्मा की इस संग्रह की कहानियां जीवन संघर्ष से मुकाबला करने की ताकत प्रदान करती है।

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