Thu. Sep 19th, 2019

आसनसोल में आसान नहीं जीत का आकलन करना

1 min read

हार-जीत का फैसला 23 को , कई उम्मीदवारों के माथे पर साफ दिख रही चिंता की लकीरें
21.05.2019

आसनसोल : लोकसभा चुनाव के नतीजे आने में अब कुछ घंटे शेष बचे हैं। ऐसे में नतीजे को लेकर राजनीतिक पार्टियों में माथा पच्ची जारी है। शासक दल के अलावा भाजपा, माकपा भी अपने जीत के दावे कर रही है, लेकिन जीत किसकी होगी यह तो समय ही बताएगा। इसी बीच आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आसनसोल शहर के नतीजों को लेकर तृणमूल के लोगों में चिंता साफ देखी जा रही है। शासक दल के लोग असमंजस में हैं। हालांकि तृकां के लोग अपनी जीत की बात कर रहे हैं, लेकिन उनमें विश्वास की कमी देखी जा रही है

पार्षदों ने दिया लीड का भरोसा, कांफिडेंस की कमी

पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले लोकसभा चुनाव में आसनसोल लोकसभा क्षेत्र से पार्टी उम्मीदवार तीन नंबर पर थे। जबकि दूसरे नंबर पर माकपा थी। इस कारण भाजपा पार्टी के उम्मीदवार एक बड़े अंतर से जीत कर आई थी।

भाजपा ने पहले से ही बना रखी थी रणनीति

लोकसभा के इस चुनाव में भी जीत के उसी अंतर को दोहराने के लिए भाजपा पार्टी नेतृत्व ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पहले से ही अलर्ट कर दिया था। इस शहर में जीत का पूरा दारोमदार इलाके के भाजपा कार्यकर्ताओं के लोगों कन्धों पर डाल दिया गया था। जबकि दूसरी ओर से शासक दल के सभी पार्षदों को अपने अपने इलाके से लीड करने का कड़ा निर्देश दिया गया था। वहीं शासकदल के नेताओं की ओर से हिदायत भी दी गयी थी कि यदि किसी कारणवस उनके क्षेत्र तथा बूथ से कोई और दल को लीड मिलता है तो उस इलाके के नेताओं पर गांज गिर सकती है। सूत्रों की माने तो उन्हें पार्टी से निष्कासित भी किया जा सकता है।

पार्षदों की जन विरोधी नीति से नुकसान की आशंका

पार्टी सूत्रों के अनुसार पिछले नगर निगम चुनाव में विवादास्पद पार्षदों को टिकट नहीं दिया था। पार्टी में शुद्धिकरण के तहत नगर निगम के चुनाव में कई पारदर्शी चेहरे को शामिल किया था, लेकिन जैसे ही वे कुर्सी पर बैठे उन्होंने पुराने पार्षदों की छुट्टी कर दी।

पार्षद अपने ही इलाके में जाने से कतराते क्यों हैं ?

क्षेत्र के निवासियों के गुस्से के कारण एक पार्षद अपने ही मोहल्ले में प्रवेश नहीं कर पा रहा है। वह लोगों के भय से अपने इलाके में जाने से कतराता है। जबकि उक्त पार्षद के इलाके में 90 प्रतिशत भाजपा को लोग अपना मतदान किये है। इस घटना से पार्टी की काफी किरिकरी हो रही है। लोगों  का मानना है कि आसनसोल के इतिहास में शायद यह पहली घटना होगी जब एक पार्षद अपने ही इलाके में जाने से कतराता है। स्थानीय निवासी और पार्टी के एक वर्ग का दावा है कि न केवल उस पार्षद बल्कि शहर में कम से कम सात से आठ पार्षदों की छवि जनविरोधी है। इससे इलाके के  में काफी रोष है।  लोगों की शिकायत है कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने जनसंपर्क नहीं किया। कुर्सी में बैठने के बाद उनमें से कुछ लोग बालू घाट में व्यस्त दिखे। इस कारण ये लोग जनता से दूर होते चले गए। इनका जनाधार भी कम होने लगा, इसलिए सत्ता पक्ष आसनसोल संसदीय क्षेत्र के परिणाम से चिंतित हैं।

बूथों पर लीड नहीं मिली तो गाज गिरने की है संभावना

19 अप्रैल को हुए मतदान के बाद आसनसोल के अधिकांश पार्षदों के नेतृत्व को सुरक्षित महसूस कराया। किसी ने डेढ़ हजार तो किसी ने दो हजार लीड देने का दावा पार्टी नेतृत्व से किया है। लेकिन चुनाव के दौरान कुछ पार्षदो में तानातनी और मतदान के बाद शहर के कई पार्षदों के खिलाफ लोगों का गुस्सा सार्वजनिक रूप से सामने आ रहा है। इससे जिले के कई नेताओं को संदेह है कि उन्हे मतदान किया है की नहीं ये सवाल खड़ा हो गया है।

ननि इलाके में किये गये विकास कार्य पर रह गया है भरोसा

हालांकि, तृणमूल के एक वर्ग का दावा है कि कुछ पार्षदों के खिलाफ गुस्सा है, लेकिन सभी विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं ने विकास कायार्ें को देखने के बाद तृंका का समर्थन किया। ममता बनर्जी के कार्यक्र मों में शामिल होकर लोगों ने इसका अपना प्रमाण भी दे दिया। पार्टी के एक जिला नेता का कहना है कि कुछ समझ नहीं आ रहा है की क्या होगा। हमनें जिस तरह से काम किया उसमें हमें अपनी बढ़त हासिल करनी चाहिए. प्रत्येक वार्ड में विकास किए गए है। आसनसोल में जल निकासी प्रणाली की दीर्घकालिक समस्या को सुलझाने के लिए पहल की गई है। शहर के हर वार्ड की सड़कें भी बदल गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

shares
error

Enjoy this blog? Please spread the word :)