Thu. Nov 26th, 2020

लद्दाख में शहीद हुए अभिषेक का राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, बड़े भाई ने दी मुखाग्नि

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रांची : लद्दाख में भारतीय सीमा पर शहीद हुए रांची के लाल अभिषेक कुमार का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह रांची के चान्हो पहुंचा। यहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानीय लोगों ने जमकर नारेबाजी की। जब तक सूरज चांद रहेगा अभिषेक तेरा नाम रहेगा के नारे से पूरा इलाका गूंज उठा। इस दौरान स्थानीय लोग हाथ में तिरंगा और भगवा झंडा लहरा रहे थे।

बड़े भाई ने दी मुखाग्नि

शहीद अभिषेक का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने शहीद जवान को सलामी दी। मुखाग्नि बड़े भाई परमानंद साहू ने दी। चोरेया स्थित श्मशान घाट पर हजारों लोगों ने नम आंखों से शहीद को विदाई दी।

मौके पर रांची के सांसद संजय सेठ, पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर, सनी टोप्पो, अनिल साहू , सेना के अधिकारी और जवान और स्थानीय लोग मौजूद थे। इससे पूर्व लद्दाख में भारतीय सीमा पर शहीद अभिषेक कुमार साहू का कांटीटांड रातू में विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के लोगों ने पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। स्वागत करने वालों संगठनों में प्रमुख रूप से बजरंग दल, भाजपा, राष्ट्रीय युवा शक्ति और स्थानीय सैकड़ों लोग शामिल थे। इ

नमें प्रमुख रूप से बजरंग दल के प्रदेश प्रशिक्षण प्रमुख रंगनाथ महतो, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य साहू, मांडर की पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर, पांकी विधायक शशिभूषण मेहता, बजरंग दल जिला संयोजक रोबिन कुमार महतो, रातू भाजपा के मंडल अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू, विहिप जिला गोरक्षा प्रमुख किशोरचंद्र विद्यार्थी, जिला प्रचार प्रसार प्रमुख राहुल राज सिंह सहित अन्य लोग शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि शहीद का पार्थिव शरीर मंगलवार की रात रांची एयरपोर्ट पहुंचा था। वहां राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, राज्य के मंत्री चंपई सोरेन समेत सेना और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। इसके बाद सेना के वाहन से जवान के पार्थिव शरीर को नामकुम एमएच अस्पताल में ले जाया गया था। वहां से सुबह सेना की गाड़ी से जवान के पार्थिव शरीर को चान्हो स्थित पैतृक गांव ले जाया गया।

चान्हो के रहने वाले अभिषेक सेना की टुकड़ी के साथ लद्दाख में तैनात थे। वह बीते शनिवार दोपहर दो बजे पहाड़ की चोटी से फिसल कर नीचे गिर गए थे। जहां वे गिरे, वहां बारूदी सुरंग बिछी हुई थी। वहां गिरने पर हुए विस्फोट से वे गंभीर रूप घायल हो गए थे। साथ ही जवान उन्हें हेलीकॉप्टर से करगिल मिलिट्री अस्पताल ले गए थे, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था।

बताया जाता है कि अभिषेक कुमार साहू तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। अभिषेक के पिता की मौत 20 वर्ष पहले ही हो चुकी है। घर में उनकी दादी 80 वर्षीया चादो देवी, माता काति देवी व भाई परमानंद रहते हैं। परिजनों के अनुसार अभिषेक 2015 में सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह जीडी के पद पर कार्यरत थे। उनके बड़े भाई परमानंद ने बताया कि वह छह माह पूर्व छुट्टी पर घर आए थे और लाकडाउन के बाद 30 मई को ड्यूटी के लिये रवाना हुए थे। वह अविवाहित थे।

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