नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने ईडी निदेशक का कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाने की शक्ति केंद्र को देने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथ को इस मामले में कोर्ट की मदद करने के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। चीफ जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली बेंच ने 19 सितंबर को अगली सुनवाई करने का आदेश दिया।

आज सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं में अधिकांश राजनीतिक दलों के सदस्य हैं, जिनके नेताओं पर ईडी का मुकदमा चल रहा है।

याचिकाएं कांग्रेस नेताओं जया ठाकुर, रणदीप सुरजेवाला, तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा, साकेत गोखले और वकील मनोहर लाल शर्मा ने दायर की हैं।

याचिकाओं में 17 नवंबर, 2021 के केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें संजय मिश्रा का कार्यकाल बढ़ाने का आदेश दिया गया है। इस मामले में 2 अगस्त को कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।

याचिकाओं में कहा गया है कि संजय मिश्रा को और सेवा विस्तार न देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया गया है। याचिका में आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार अपनी जांच एजेसियों का इस्तेमाल कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष और पदाधिकारियों के खिलाफ कर रही है।

राजनैतिक द्वेष की भावना से विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए जांच के नाम पर कांग्रेस नेताओं को परेशान किया जा रहा है। ये लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

दरअसल, 8 सितंबर, 2021 को जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुप्रीम कोर्ट ने ईडी निदेशक संजय मिश्रा को मिले नवंबर 2021 तक के सेवा विस्तार को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेवा विस्तार का सरकार को अधिकार है लेकिन यह बहुत ज़रूरी मामलों में ही होना चाहिए। कोर्ट ने कहा था सेवा विस्तार सीमित समय के लिए होना चाहिए । कोर्ट ने कहा था कि ईडी निदेशक को नवंबर 2021 के बाद आगे सेवा विस्तार न दिया जाए।

उसके बाद केंद्र सरकार ने नवंबर 2021 में एक अध्यादेश के जरिए ईडी और सीबीआई के निदेशक का कार्यकाल पांच साल तक रहने की व्यवस्था बनाई है। इसी के तहत ईडी निदेशक संजय मिश्रा का कार्यकाल 18 नवम्बर, 2022 तक बढ़ा दिया गया था।