डीजीसीए ने सोमवार को कहा कि रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर 7 मई को एक दिव्यांग बच्चे को विमान में बैठने की अनुमति नहीं देने के मामले में एक तथ्यान्वेषी समिति ने इंडिगो के कर्मचारियों को नियमों का प्रथम दृष्टया उल्लंघन करते पाया है. इसके बाद विमानन कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

नयी दिल्ली: दिव्यांग बच्चे को विमान में नहीं बैठने देने के मामले में इंडिगो (IndiGo Airlines) फंस गया है. नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इस संबंध में इंडिगो को नोटिस जारी किया है. विमानन कंपनी से 10 दिन में अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है.

प्रथम दृष्टया इंडिगो के कर्मचारी दोषी

डीजीसीए ने सोमवार को कहा कि रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट (Birsa Munda Airport) पर 7 मई को एक दिव्यांग बच्चे को विमान में बैठने की अनुमति नहीं देने के मामले में एक तथ्यान्वेषी समिति ने इंडिगो के कर्मचारियों को नियमों का प्रथम दृष्टया उल्लंघन करते पाया है. इसके बाद विमानन कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

इंडिगो ने दी थी ये सफाई

विमानन कंपनी ने 9 मई को कहा था कि बच्चे को इसलिए विमान में सवार नहीं होने दिया गया, क्योंकि वह ‘स्पष्ट रूप से घबराया हुआ’ था. बच्चे को रांची से हैदराबाद जा रहे विमान में सवार होने की अनुमति नहीं दिये जाने के बाद उसके माता-पिता ने भी विमान में नहीं बैठने का फैसला किया था.

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तथ्यान्वेषी समिति ने सौंपी अपनी रिपोर्ट

डीजीसीए ने इस मामले की जांच करने के लिए एक तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया था. डीजीसीए ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘समिति ने अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है.’ उसने कहा, ‘समिति की जांच के निष्कर्ष के अनुसार, इंडिगो के कर्मचारी यात्रियों के साथ सही तरीके से पेश नहीं आये और इस तरह उन्होंने लागू नियमों के अनुरूप काम नहीं किया.’

डीजीसीए ने जारी किया नोटिस

डीजीसीए ने कहा कि इसके मद्देनजर उसके अधिकृत प्रतिनिधि के जरिये विमानन कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला किया गया है, जिसमें उसे बताना होगा कि नियमों के अनुरूप काम नहीं करने पर उसके खिलाफ उचित कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए.

इंडिगो से 10 दिन में मांगा गया जवाब

उसने कहा, ‘सभी पक्षों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विमानन कंपनी को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया है और इसके अलावा उसे आज से यानी 16 मई, 2022 से अगले 10 दिन के भीतर लिखित अभ्यावेदन भी देना होगा. उसके अभ्यावेदन को सुनने के बाद कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जायेगी.’