सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के पूर्व मंत्री के खिलाफ तय किए गए आरोपों को रद्द करने से इनकार किया

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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने साल 2016 में कर्नाटक के धारवाड़ जिले में बीजेपी कार्यकर्ता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में राज्य के पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी के खिलाफ एक विशेष अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को निरस्त करने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाश पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि पूर्व मंत्री का मामला खारिज करने लायक नहीं है. पीठ ने कहा, “यह खारिज करने योग्य मामला नहीं है.”

शीर्ष अदालत ने कांग्रेस विधायक कुलकर्णी द्वारा 8 अप्रैल के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उनके और 20 अन्य के खिलाफ विशेष अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को बरकरार रखा गया था. कुलकर्णी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने शीर्ष अदालत को बताया कि विधायक का नाम केवल सीबीआई द्वारा दायर दूसरे आरोप पत्र में है और मृतक की विधवा के बयान में उनके नाम का खुलासा नहीं किया गया है.

इस पर न्यायमूर्ति कुमार ने कहा, “आपने मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर सरकारी वकील के तबादले की मांग की है, क्योंकि वह आपके मंत्री के प्रभाव के बिना, पूरी ताकत से मुकदमे का संचालन कर रही थी.” दवे ने जवाब दिया, “जब मैं मंत्री था, तब भी मुकदमा चला था, लेकिन मृतक की पत्नी ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की.” न्यायमूर्ति कुमार ने कहा, “आपने स्पष्ट रूप से विधवा को खरीद लिया है… विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है.” दवे ने याचिका वापस लेने के लिए शीर्ष अदालत से अनुमति मांगी, जिसे पीठ ने अस्वीकार कर दिया. ” शीर्ष अदालत ने कहा कि ये बंद होना चाहिए. सर्वोच्च न्यायालय में अपनी किस्मत आजमाना, फिर पीछे हट जाना, यह न्यायालय जुआ खेलने का न्यायालय बन गया है या क्या?”

हेब्बल्ली निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा जिला पंचायत सदस्य 26 वर्षीय गौड़ा की 15 जून, 2016 को धारवाड़ में हत्या कर दी गई थी. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 24 सितंबर, 2019 को जांच अपने हाथ में ली और 5 नवंबर, 2020 को कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया था. कुलकर्णी ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है. सीबीआई ने आरोप लगाया है कि कुलकर्णी की गौड़ा के साथ व्यक्तिगत दुश्मनी और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता थी, जिन्होंने 2016 में जिला पंचायत चुनावों से हटने के उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था.

 

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