यूपी और बिहार के दो शहर और एक वैज्ञानिक अब मंगल ग्रह पर !

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New Delhi: मंगल ग्रह की सतह पर हाल ही में खोजे गए तीन गड्ढों (क्रेटर) के नाम लाल, मुरसान और हिलसा रखे गए हैं. अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) ने इन्हें ये नाम दिया है. पीआरएल के निदेशक अनिल भारद्वाज के अनुसार ये नाम अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार रखा गया है. खोजे गए इन क्रेंटर के जब नाम रखने की बारी आई तो मुरसान और हिलसा क्रमशः उत्तर प्रदेश (यूपी) और बिहार के शहर के नाम चुने गए. भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग की  इकाई पीआरएल ने बुधवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि तीन क्रेटर मंगल ग्रह के थारिस ज्वालामुखी क्षेत्र में स्थित हैं. थारिस मंगल ग्रह के पश्चिमी गोलार्ध में भूमध्य रेखा के पास केंद्रित विशाल ज्वालामुखीय पठार है.

ताजा खोज वैज्ञानिकों की एक टीम की ओर से की गई, जिसमें गुजरात के अहमदाबाद स्थित पीआरएल के शोधकर्ता शामिल रहे. जून, 2024 की शुरुआत में एक अंतरराष्ट्रीय निकाय ने नामकरण को मंजूरी दी.

पीआरएल के निदेशक अनिल भारद्वाज ने एक विज्ञप्ति में कहा कि पीआरएल की सिफारिश पर, अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (आईएयू) के एक कार्य समूह ने पांच जून को लाल क्रेटर, मुरसान क्रेटर और हिलसा क्रेटर को नाम देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी. बयान में कहा गया है कि इन क्रेटरों की खोज से यह ठोस सबूत मिला है कि मंगल ग्रह कभी गीला था और इसकी सतह पर पानी बहता था.

इनका नाम अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार रखा गया है. दिशा-निर्देशों के अनुसार छोटे क्रेटरों का नाम छोटे शहरों के नाम पर रखना होता है और बड़े क्रेटरों का नाम प्रसिद्ध हस्तियों के नाम पर.

लाल क्रेटर का नाम प्रोफेसर देवेंद्र लाल के नाम पर रखा गया है. प्रोफेसर देवेंद्र लाल का जन्म वाराणसी में हुआ था. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और बॉम्बे विश्वविद्यालय से स्नातक किया था. उनकी थीसिस कॉस्मिक किरण भौतिकी पर थी. 1972-1983 के दौरान पीआरएल के निदेशक थे.

लाल क्रेटर 65 किलोमीटर चौड़ा है और तीनों में सबसे बड़ा है. मंगल ग्रह पर थारिस ज्वालामुखी क्षेत्र में लाल क्रेटर का पूरा क्षेत्र लावा से ढका हुआ है. इस क्रेटर में लावा के अलावा अन्य सामग्री के भूभौतिकीय साक्ष्य हैं.

मुरसान और हिलसा क्रेटर लगभग 10 किलोमीटर चौड़े हैं तथा लाल क्रेटर की परिधि के पूर्वी और पश्चिमी किनारों पर स्थित हैं

 

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