भाजपा के आरोप पर कांग्रेस का पलटवार, भुंइहरी और मुंडारी खुंटकटी भूमि जमींदारी से दूर, नहीं हो सकता म्यूटेशन: डॉ संजय सिंह

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Ranchi : रांची के बरियातू एरिया में जिस 8.46 एकड़ जमीन को लेकर विवाद है और पूर्व सीएम हेमंत सोरेन को ईडी ने हिरासत में लिया है, अब कहा जा रहा कि यह जमीन राजस्व विभाग झारखंड की ओर से जमीन मालिकों को लौटा दी गयी है. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने इससे संबंधित आशंका सोशल मीडिया के जरिये साझा की है. साथ ही सीएम चंपाई सोरेन से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की भी अपील की है. भाजपा की इस आशंका पर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ संजय सिंह ने कहा कि बिहार भूमि सुधार अधिनियम 1950 से जमींदारी का उन्मूलन हुआ और जमीदारों की संपत्ति सरकार की हो गई. ऐसी सभी भूमि सरकार में निहित हो गई और सरकार का मालिकाना हक हो गया.

भुंइहरी और मुंडारी खुंटकटी भूमि जमींदारी से दूर

उन्होंने कहा कि भुंइहारी और मुंडारी खुंटकटी भूमि को जमींदारी से दूर रखा गया. ऐसी भूमि का ना तो अंचल अधिकारी जमाबंदी खोल सकते हैं और ना ही सरकार के लिए लगान ले सकते हैं. ऐसी सभी श्रेणियों की भूमि पर लगन वसूलने का अधिकार सिर्फ भुइनारदार और मुंडारी खुंटकटीदार को है. क्योंकि वे उनके जमींदार थे. कभी भी ऐसी भूमि पर जमाबंदी अंचल में खोला जायेगा तो वह अवैध होगा. साथ ही जमाबंदी को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है. क्योंकि सरकार भुंइहारी और मुंडार खुंटकटी भूमि पर लगन नहीं वसूल सकती है. ऐसे किसी वैधिक प्रक्रिया को राजनीति से जोड़ कर देखना बीजेपी का मानसिक दिवालियापन है. भुंइहारी और मुंडारी खुंटकटी की जमींदारी सरकार ने बंद नहीं की है. इस नेचर की जमीन के मालिक जमींदार ही हैं. अपनी भूमि का स्थानांतरण कर सकते हैं. सीएनटी की सुसंगत धाराओं के अंतरगत ऐसी भूमि के रैयतों से लगान लेने का अधिकार सिर्फ जमीन मालिको को है. अंचल में म्यूटेशन कर जमाबंदी नहीं खोली जा सकती है.

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