बेरमो में रिवाइवल ऑफ ट्राइबल एंड फोक आर्ट फाउंडेशन द्वारा चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन

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Bermo: बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के ऑफिसर्स क्लब में रविवार को रिवाइवल ऑफ ट्राइबल एंड फोक आर्ट फाउंडेशन के द्वारा मधुबनी पेंटिंग सहित विभिन्न प्रसिद्ध चित्रकारों की चित्रकला एवं पेंटिंग प्रदर्शनी का आयोजन संस्था की संस्थापक आयोजक सह निदेशक तथा डीवीसी सिविल के अभियंता शिशु मोहन की पत्नी डॉ छाया कुमारी के द्वारा किया गया.प्रदर्शनी का उदघाटन बतौर मुख्य अतिथि डीवीसी के एचओपी आनंद मोहन प्रसाद एवं विशिष्ट अतिथि रिंकी प्रसाद के द्वारा फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया.

प्रदर्शनी में आये हुए आंगतुकों को संबोधित करते हुए डीवीसी के एचओपी ने कहा कि चित्रकला एवं पेंटिंग प्रदर्शनी में जीवन के विभिन्न रूपों को चित्रकारों के द्वारा दिखाने की कोशिश की जाती है,और प्रत्येक चित्र एवं पेंटिंग भी बहुत कुछ कहती है.कहा कि तस्वीरों को गहनता से देखने पर पता चलता है कि हर तस्वीर कुछ ना कुछ कहती है या संदेश देती है.विशिष्ट अतिथि रिंकी प्रसाद ने कहा कि मधुबनी चित्र को बनाने के लिए घरेलू विधि द्वारा तैयार रंगों का ही इस्तेमाल किया जाता रहा है ताकि विशेषता बरकरार रहे और चमक स्पष्ट दिखे.

 

प्रदर्शनी की आयोजक एवं संस्था की निदेशक डॉ छाया ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि प्रदर्शनी में ऐसे चित्रों को प्रस्तुत किया गया है जो कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किए जा चुके हैं.उन्होंने बताया कि समय समय पर फाउंडेशन द्वारा प्रदर्शनी आयोजित की जाती है और सामाजिक एवं धार्मिक मुद्दों को भी प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया गया.हर प्रकार के रंगों से तस्वीरें बनाई गईं हैं,खासकर मधुबनी पेंटिंग की तस्वीरों में.कहा कि मिथिला पेंटिग ने अपने बदलते रंगों के साथ चार दशकों में विदेशों में भी गहरी छाप छोड़ी है,लेकिन अपने देश में अब भी उसे ठीक से ठिकाना नहीं मिला है.जहां बाजार में भारतीय कला को मुंह-मांगी कीमतों पर खरीदा-बेचा जा रहा है,वहीं मिथिला शैली पर पहचान का संकट है.

कहा कि शुरुआती दौर में मधुबनी पेंटिंग बनाने के लिए घरेलू विधि द्वारा तैयार किए रंगों का ही इस्तेमाल किया जाता था.प्रदर्शनी में झारखंड के प्रतिभागियों में अंजीता सामल,गीता रॉय,नीतू गुलाटी,रेणुका अय्यर,स्पंदिता चक्रवर्ती,स्वाति सिंह तथा डीवीसी के अवकाश प्राप्त कार्यपालक अभियंता सह प्रसिद्ध चित्रकार आनंद प्रकाश मेहता सहित कई चित्रकार की पेंटिंग एवं चित्र प्रदर्शनी के लिए लगाया गया था जिसे आगंतुकों ने काफी बारीकी से अवलोकन किया एवं सराहा.मौके पर डीवीसी के डीजीएम बीजी होलकर भी मौजूद थे.संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन शिशु मोहन ने किया.

प्रसि़द्ध चित्रकार विनीता के ग्राफिक्स संकलन का लोकार्पण

कोलकाता में आयोजित 47वें अंतर्राष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेला में बोकारो थर्मल की प्रख्यात ग्राफिक्स चित्रकारा विनीता बंद्योपाध्याय की कुल 26 ग्राफिक्स चित्रकला सहित उनकी कविता द्वारा प्रस्तुत चित्रभाष्य सम्मिलित कर एक संकलन का लोकार्पण रविवार को किया गया.साहित्य प्रेमी व कला प्रेमी द्वारा समादृत इस बंगला संकलन पुस्तक का नाम “ध्वंसस्तूपे गान“ है. 31 जनवरी तक चलने वाले मेला में काफी संख्या में पुस्तकों को शामिल किया गया है.

 

चित्रकार विनीता साहित्य,संगीत व कला पर भी पेंटिंग के अलावा रुचि रखतीं हैं.ग्राफिक्स कला की श्रमशील कठिन माध्यम लिथोग्राफी जैसी प्राचीन शैली उनकी प्रिय माध्यम है.वर्तमान काल में इन माध्यमों को जनमानस में पुनर्जागरित करना विनीता का लक्ष्य है.साथ ही मेला में उनके पुत्र अनुव्रत बंद्योपाध्याय “फ़हम“ की पहली हिंदी कविता संकलन “वजूद-नामा“ का भी विमोचन मेला में किया गया.पुस्तक में उर्दू प्रभावित भाषा का प्रयोग इसकी खासियत है.मानवीय संवेदन तथा अनुभव की अभिव्यक्ति भी नजर आती है.प्रथम दृष्टि में प्रेम विषयक प्रतीत होती ये कविताएं सूक्ष्म विश्लेषण पर जीवन के पहलुओं को दर्शाता है.

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