Sat. Oct 31st, 2020

कृष्ण कुमारी ऑफ पाकिस्तान

1 min read

“यदि कृष्ण कुमारी जीतती हैं, तो पाकिस्तान में यह जीत अपने तरह का एक ऐतिहासिक करिश्मा होगा। वह पहली हिंदू महिला होगी जो सिनेट की सदस्य होगी। कृष्ण कुमारी का परिवार सिंध के कोली समाज से है। बिरादरी की परम्परा के अनुसार 16 वर्ष की उम्र में ही उनकी शादी हो गयी थी।”

फीरोज अशरफ

सिंध की सोशल एक्टिविष्ट और पीपुल्स पार्टी ऑफ पाकिस्तान ने पाकिस्तान के सेनेट (राज्य सभा) की सदस्यता के लिए कृष्णा कुमारी को मनोनीत करके यह साबित करने की कामयाब कोशिश की है कि पार्टी न केवल एक सेक्यूलर पार्टी है बल्कि पाकिस्तान की महिलाओं की राजनीतिक और समाजिक विकास के लिए भी कटिबद्ध है। वैसे पीपुल्स पार्टी ने शुरू से ही पाकिस्तानी धार्मिक अल्पसंख्यकों, हिंदुओं, ईसाइयों, पारसियों के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं। ध्यान देने की बात है कि सन 1968 में पीपुल्स पार्टी अपने निर्माण के बाद समय रोटी, कपड़ा और मकान के नाम पर चुनाव लड़ा था। उनके मेनिफेस्टो में मजहब का नाम नहीं था। पार्टी प्रमुख, जुल्फिकार अली भुट्टों ने मजहबी कट्टरपंथियों को शुरू में अपनी पार्टी से दूर रखा। इसका नतीजा यह हुआ उनकी पार्टी से फै़ज अहमद फैज जैसे प्रगतिशील हस्ती के साथ मशहूर जनकवि हबीब जालिब, अहमद नदीम कासमी, फहमीदा रियाज, जाहिदा हिना इत्यादि वामपक्षी बड़ी संख्या में जुड़े।

अल्पसंख्यक मुख्यधारा में कम
स्वाभाविक रुप से संख्या में बहुत कम, लेकिन पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों को पिपुल्स पार्टी से जुड़ना ही था, और वे जुड़े भी। बल्कि जुल्फिकार अली भुट्टो ने एक जाने माने हिंदू, राणा साहब को अपने मंत्री मंडल में भी लिया। बाद में बेनजीर के शासन काल में कोयटा के पारसी वकील जमशेद मार्कर और कराची के पारसी चिंतक दाराब पटेल को उच्च सरकारी पद दिया। इसके अतिरिक्त दूसरे कई धार्मिक अल्पसंख्यक अपनी योग्यता और निष्ठा के कारण पाकिस्तानी प्रशासक और समाज में हैं। लेकिन कुल मिलाकर लगभग 9-10 प्रतिशत धार्मिक अल्पसंख्यक पाकिस्तान की मुख्यधारा में कम ही दिखाई देते हंै। वैसे पाकिस्तान में भला क्या मुख्य् धारा। वहां की राजनीतिक, समाजिक, महौल में खून खराबा , अलग अलग मान्यताओं के बीच टकराव, कबीलाई और जागीरदारी समाजिक व्यवस्था से अपने निरंकुश तानाशाह जागीरदार, जमीनदार, सरदार और उनके साथ उसी व्यवस्था के अधकचरे सामंतवादी मानसिकता वाले राजनीतिक और नौकरशाह। उसके ऊपर सब से ज्यादा प्रभावशाली फौज का दबाव, उसकी मजहब के नाम पर धार्मिक आतंकवादियों को प्रोत्साहन!

कुल मिलाकर, अल्पसंख्यकों को तो छोड़िए स्वंय बहुसंख्यक रोजी रोटी से लगे हुए हैं आम मुसलमान। वह सुबह घर से निकलता है तो शाम को घर वापसी का भी भरोसा नहीं।

हिंदू दुराग्राहों का शिकार
इस सच्चाई को मानना पड़ेगा, बल्कि यही सच है कि शुरू से ही पाकिस्तान में हिंदू बिरादरी दुराग्राहों का शिकार रही है। सिंध के अतिरिक्त बलूचिस्तान, पंजाब और सूबा सरहद में बहुत कम संख्या में हिंदू आबाद हैं। सिंध में विशेषकर दक्षिण सिंध थार क्षेत्र में उनकी कुछ ज्यादा संख्या हैं। सन 1996 में बेनजीर ने उन्हें पूर्ण मताधिकार दिया। उससे पहले पाकिस्तान के संविधान के अनुसार अल्पसंख्यकों के लिए पार्लियामेंट और सूबाई असेंबलियों में 10 प्रतिशत सीट रिजर्व थी। उसमें भी हिंदुओं ईसाईयों, सिखों, पारसियों और बौध्दों व अन्य की जनसंख्या के हिसाब से उनक ी सीटें निर्धारित होती थी। इसका मतलब यह हुआ कि आरक्षित दस प्रतिशत की सीट एक बार फिर अलग अलग धर्म माननेवालों के बीच विभाजित हो जाती। यानी पांच प्रतिशत हिंदुओं और दो ढ़ाई प्रतिशत ईसाईयों के उसी अनुपात में निर्वाचित सदस्य होत थेे। इस हिसाब से अगर बेनजीर के निर्वाचन क्षेत्र का कोई ईसाई उन्हें अपनी इच्छानुसार वोट नहीं दे सकता था। उसे सिंध या अपने क्षेत्र से दूर बलूचिस्तान, पंजाब या बलोचिस्तान के उस उम्मीदवार को वोट देना होता, जिसे वह जानता भी नहीं। कुल मिलाकर अल्पसंख्याकों को वोट देने के इस उलझन भरे विशेषाधिकार में बेहद कन्फयूजन था। बेनजीर ने वोट के लिए उन्हें पूर्ण अधिकार दिया और उनके लोकतांत्रिक अधिकार को बहाल किया।

यदि कृष्ण कुमारी जीतती हैं, तो पाकिस्तान में यह जीत अपने तरह का एक ऐतिहासिक करिश्मा होगा। वह पहली हिंदू महिला होगी जो सिनेट की सदस्य होगी। पीटीआई के अनुसार कृष्ण कुमारी का परिवार सिंध के कोली समाज से है। बिरादरी की परंपरानुसार 16 वर्ष की आयु में जब वह नवीं क्लास की छात्रा थी, उनकी शादी लालचंद से हुई। बाद में उन्होंने सोशिलॉजी में सिंध यूनिवर्सिटी से एम.ए. की डिग्री ली। उसी दौरान उन्हें समाजिक कार्य की प्रेरणा मिली और पीपुल्स पार्टी से जुड़ी। सुश्री कृष्ण कुमारी उन लोगों में से हैं, जिन्हें पाकिस्तान जैसे देश में भी अल्पसंख्याक महिला होने पर विशेष सम्मान प्राप्त हुआ। योग्यता के सामने हर किसी का सिर झुकता ही है। मिसाल है पाकिस्तान की कृष्ण कुमारी।

shares
error

Enjoy this blog? Please spread the word :)