Fri. Dec 6th, 2019

काव्य संध्या में युवा कवियों ने प्रस्तुतियों से बांधा समां

वो घर बहुत भाता है, जिसमें खुला अहाता है…

रांची, 20 जुलाई: नारायणी साहित्य अकादमी रांची एवं अशोक नगर महिला क्लब के संयुक्त तत्वावधान में काव्य संध्या का आयोजन हुआ। नवोदित एवं युवा कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा। युवा कवि जवाहर लाल जी ने घर की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि वो घर बहुत भाता है, जिसमें खुला अहाता है, ताजी ताजी हवा आती चैन भी बहुत आता है। नवोदित रचनाकार गीता चौबे ने कहा मैं तो हूं एक हरित बगिया की सुंदर सी सुकुमार कली, जिसमें है एक आस पली। सावन की रिमझिम फुहारों के साथ स्नेहा राय ने मनवा क्यों बहका बहका, अखियां क्यों प्यासी प्यासी, तपती जो कल तक धरती भीग चुकी, रे मनवा मान जा की बात कही। सदानंद यादव ने पुकारातन शीतल मन निर्मल हो जाये इस पावस में,नीलगगन के काले बदरा, कुछ बरसों ऐसे सावन में। बावरे मन की चंचलता पर संध्या चौधरी की चाहत उभरी बैठे बैठे सोचे यह मान बावरा, नम आंखें हैं फिर भी बिंदास रहना चाहती हूं। इतिहास पर तंज कसते हुए नारायणी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आशुतोष प्रसाद ने कहा अर्जुन के तीरों की धार में वह पैनापन नहीं रह गया है, अब चौसर के खेल में तुम्हें कोई नहीं हारेगा कार्यक्रम में इमरान, वर्षा ऋतुराज, सुरिंदर कौर नीलम, मीता भाटिया, माया वर्मा, प्रियदर्शी, रेणु झा, संगीता कुंजारा टाक, ज्योतिका वर्मा, इंदु पांडेय, निर्मला सिंह, कृष्णा श्रीवास्तव, चेतना झा, नन्दिनी प्रणय, अरविंद कुमार, शालिनी नायक, एंजिल लकड़ा, अंजू एवं उमेश चंद्र मिश्र ने भी अपनी सरस रचनाओं से रससिक्त किये रखा। अशोक नगर महिला क्लब रांची की अध्यक्ष ज्योतिका वर्मा ने स्वागत किया एवं धन्यवाद ज्ञापन संगीता टाक ने किया। इस अवसर पर संस्कार भारती रांची के उमेश चंद्र मिश्र , रामानुज पाठक एवं लायनेस की पूर्व अध्यक्ष पूनम बाला भी विशेष तौर पर उपस्थित थे।

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