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अखिलेश ने पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों को लेकर भाजपा पर बोला हमला

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21 मई, 2018

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने सोमवार को ट्वीट कर पेट्रोल डीजल के बढ़े दामों को लेकर केंद्र पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह कर्नाटक चुनाव में भाजपा के अनुरूप नतीजे न आने का सबब है।

सपा मुखिया ने कहा कि केन्द्र सरकार कर्नाटक चुनाव तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ा रही थी लेकिन परिणाम पलटते ही इनके दामों में रिकार्ड तोड़ बढ़ोत्तरी कर जनता की कमर तोड़ दी गयी है। क्या जनता को सरकार के खिलाफ जाने की सजा दी जा रही है। लगता है अब सत्ताधारी जनता से भी बदले की भावना से पेश आ रहे हैं ।

गौरतलब है कि अखिलेश यादव लगातार केन्द्र और राज्य सरकार पर ट्वीटर के माध्यम से हमला बोलते रहते हैं। इससे पहले भी उन्होंने कर्नाटक चुनाव को लेकर कटाक्ष किया था। उन्होंने लिखा था कि राजनीति में धनबल की जगह जनमत की जीत का दिन है।

सबको खरीद लेने का दावा करने वालों को आज ये सबक मिल गया है कि अभी भी भारत की राजनीति में ऐसे लोग बाकी हैं, जो उनकी तरह राजनीति को कारोबार नहीं मानते हैं। नैतिक रूप से तो केंद्र की सरकार को भी इस्तीफा दे देना चाहिए।

क्यों बन रहे रेकॉर्ड्स?
घटा उत्पादन: पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि OPEC (पेट्रोलियम नियार्तक देशों के संगठन) देशों में तेल के कम उत्पादन की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दाम बढ़ गए हैं। क्रूड के प्राइस में हाल की तेजी के पीछे डिमांड में वृद्धि होना, सऊदी अरब की अगुवाई में तेल उत्पादक देशों का उत्पादन में कमी करना, वेनेजुएला में उत्पादन में गिरावट और अमेरिका का ईरान पर प्रतिबंध लगाने का फैसला जैसे कारण हैं।

भरपाई कर रहीं सरकारी कंपनियां
सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों के पास इंटरनैशनल फ्यूल रेट्स और करंसी के एक्सचेंज रेट के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रतिदिन बदलाव करने की छूट है। लेकिन हाल के दिनों में फ्यूल के इंटरनैशनल रेट बढ़ने के बावजूद कर्नाटक में मतदान से 19 दिन पहले से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव को रोक दिया गया था। अब पेट्रोलियम कंपनियां इस अवधि के दौरान हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं।

कर्नाटक चुनाव के बाद शुरू हुई वृद्धि
कीमतों में बढ़ोतरी 14 मई को दोबारा शुरू होने के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमश: 1.61 रुपये और 1.64 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। फ्यूल की कीमतें बढ़ने से महंगाई में भी वृद्धि हुई है। इससे करंट अकाउंट डेफिसिट भी बढ़ने की आशंका है।

कीमतों में टैक्स का कितना योगदान है?
पेट्रोल की खुदरा कीमतों में 50% से ज्यादा हिस्सा अलग-अलग टैक्सों और डीलरों के कमीशनों का होता है। डीजल में इसकी हिस्सेदारी 40% से ज्यादा होती है। चूंकि अलग-अलग राज्य अलग-अलग दर से टैक्स वसूलते हैं, इसलिए हर राज्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अंतर हो जाता है।

कहां सबसे सस्ता, कहां सबसे महंगा?
पेट्रोल मुंबई में सबसे महंगा है जबकि हैदराबाद में डीजल सबसे महंगा है। मजेदार बात यह है कि कई शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बहुत कम अंतर है। यानी, वहां डीजल वाहनों के मालिकों को पेट्रोल वाहनों के मालिकों के मुकाबले खास बचत नहीं हो रही।

पड़ोसी देशों के मुकाबले भारत में सबसे ऊंची कीमत है?
अमेरिका को छोड़कर विकसित देशों में पेट्रोलियम पर बहुत ज्यादा टैक्स लगाए जाते हैं। हालांकि, उन देशों के नागरिकों की औसत आमदनी भी भारतीय नागरिकों की औसत आय के मुकाबले ज्यादा है। इस वजह से उन देशों के नागरिकों पर पेट्रोलियम की ऊंची कीमतों का उतना असर नहीं पड़ता जितना हम भारतीयों पर। सामान्य आंकड़े के मुताबिक, औसत भारतीय को एक लीटर पेट्रोल खरीदने के लिए अपनी उस दिन की आमदनी का 20 प्रतिशत खर्च करना होता है।

बड़े देशों में कहां-कितनी कीमत?
देश – पेट्रोल – GDP प्रति व्यक्ति आय – प्रति व्यक्ति आय का %
भारत – $1.16 – $6 – 19.8
चीन – $1.19 – $28 – 4.3
ब्राजील – $1.16 – $28 – 4.1
रूस – $0.70 – $33 – 2.1
फ्रांस – $1.82 – $123 – 1.5
यूके – $1.69 – $119 – 1.2
जर्मनी – $1.69 – $139 – 1.2
जापान – $1.30 – $112 – 1.2
अमेरिका – $0.83 – $170 – 0.5

पड़ोसी देशों में कहां-कितनी कीमत?
देश – पेट्रोल – डीजल
नेपाल – ₹66.6/लीटर – ₹54.7/लीटर
श्रीलंका – ₹49.6/लीटर – ₹40.3/लीटर
बांग्लादेश – ₹68.4/लीटर – ₹51.7/लीटर
पाकिस्तान – ₹50.6/लीटर – ₹57/लीटर
भारत – ₹74.6/लीटर – ₹65.9/लीटर
*सभी देशों की कीमत भारतीय रुपये में

दबाव में सरकार
इससे उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार पर ड्यूटी में कमी करने का दबाव बढ़ा है। पेट्रोलिय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘मैं मानता हूं कि देश के लोगों को और मुख्यतः मध्यम वर्ग के लोगों पर पेट्रोल, डीजल की कीमतों का बुरा असर पड़ा है। भारत सरकार इसका हल निकालने के लिए जल्द ही कोई कदम उठाएगी।’ हालांकि उन्होंने साफ नहीं किया कि इस दिशा में सरकार क्या कदम उठाने जा रही है।

घटाई थी एक्साइज ड्यूटी

केंद्र सरकार ने फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर कम करने के लिए पिछले वर्ष अक्टूबर में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 2 रुपये प्रति लीटर की कमी की थी। लेकिन क्रूड के प्राइसेज में तेजी जारी रहने से इसका असर जल्द ही समाप्त हो गया था। नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच क्रूड के प्राइसेज गिर रहे थे। उस अवधि में केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 11.77 रुपये और डीडल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई थी। अब क्रूड के पिछले कुछ समय से महंगा होने के कारण ड्यूटी में कमी करने की मांग की जा रही है।

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