Category - आलेख

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मेरठ से लाल किला तक मार्च

“ह्यजो करना है, कर गुजरोह्ण और ह्यदिल्ली चलोह्ण सभी के नारे थे। बीच-बीच में ह्यहर-हर महादेवह्ण का नारा भी लगता। उनको रोकने वाला कोई नहीं था। छावनी से...

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चुनाव आयोग की विश्वनीयता का सवाल

“पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाला चुनाव आयोग अगर स्वयं को इतना असहाय समझेगा तो लोकतंत्र की उस बुनियाद का क्या होगा, जो देश में स्वतंत्र...

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एक्जिट पोल और उसके बाद

“23 मई को चुनावी नतीजा आने के पहले तक विपक्षी नेताओं की राजनैतिक गतिविधियां एक्जिट पोल के नतीजों से प्रभावित होती रहेंगी। वैसे ये नेता एक्जिट पोल को गलत...

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कौन उन्नीस, कौन बीस

“वैसे इस चुनाव में जीत-हार किसी की भी हो लेकिन लोकतंत्र पराजित हो गया है। भारतीय संस्कृति-सभ्यता हार गयी है। आचार -विचार, बोल-व्यवहार का क्षरण पूरे देश...

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राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता या दुश्मनी

“ममता की राजनैतिक महत्वाकांक्षा ने भाजपा से उनकी राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता को कब राजनैतिक दुश्मनी का रूप दे दिया शायद वे भी नहीं समझ पायी। लेकिन पश्चिम...

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बंगाल में बदलाव के संकेत

“आजादी के बाद बंगाल का यह इतिहास रहा है कि जब-जब सत्ता परिवर्तन हुआ है, तब-तब बंगाल में हिंसा हुई है। बावजूद चुनाव के समय हिंसा पर नियंत्रण नहीं होना...

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नरेन्द्र मोदी के मुकाबले कौन?

“अभी तो मोदी विरोधी धड़े का नेता खोजा जा रहा है। इस खोज में अपना पक्ष आगे करने में कोई दल संकोच नहीं कर रहा है। इसलिए चाहें ममता बनर्जी हों, मायावती या...

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दोहरे मापदंड और दायित्वहीनता की पत्रकारिता, पश्चिमी मीडिया का भारत-विद्वेष, वर्षों से जारी एक अघोषित अभियान

बलबीर दत्त; 19.05.2019 भारत की आजादी के समय से ही ब्रिटिश व अमेरिकी मीडिया के एक बड़े वर्ग का रुख भारत के प्रति उपेक्षापूर्ण और विद्वेषपूर्ण रहा, जिसके यहां कई...

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कोई रोके बंगाल को लहुलूहान होने से

“पश्चिम बंगाल में इस लोकसभा चुनाव के दौरान जिस तरह की भयंकर हिंसा देखी गयी, उससे देश दहल गया है। देशभर के शांतिप्रिय नागरिक हतप्रभ हैं। जहां सारे देश में...

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सेना में महिलाओं की भागीदारी

“विदेशी सेनाओं के मुकाबले भारतीय सेना में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की बात की जाए तो हम बहुत पीछे हैं। हालांकि अब सेना में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 20 फीसदी...