राजनीति

मोदी को हराने के लिए ममता का माओवादियों से गठजोड़ !

11 मई, 2019

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में वामपंथी शासन के दौरान सत्ता समर्थित हिंसा तथा माओवाद के खिलाफ लड़कर राज्य की सत्ता पर काबिज हुई ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा को रोकने के लिए अब माओवादियों से ही हाथ मिला लिया है। तृणमूल ने पूर्व माओवादियों की पलटन और कट्टरपंथियों से लड़ चुके लोगों को एकजुट किया है। तृणमूल कांग्रेस ने जो पलटन तैयार की है, उसमें माओवादी समर्थित पुलिस अत्याचार विरोधी जन सामिति (पीसीएपीए) के सदस्य हैं तो कुछ ‘जन जागरण मंच’ जैसे ग्राम प्रतिरोधक गुट के लोग भी शामिल हैं।

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि ऐसा बल इस समय की आवश्यकता है क्योंकि भाजपा के खिलाफ लड़ाई राजनीति के साथ ही विचारधारा की भी है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस विरोधियों को दबाने के लिए हिंसा का सहारा ले रही है। उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। राज्य में अपने खिलाफ राजनीतिक माहौल को देखते हुए ममता अपने दुश्मनों से भी मदद लेने को तैयार हैं।

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि भाजपा के खिलाफ प्रचार के लिए कम से कम 200 लोगों का दल पश्चिम मिदनापुर और झाड़ग्राम में है। पार्टी नेता स्वीकार करते हैं कि लोग स्थानीय नेतृत्व से खफा हैं। वह कहते हैं, पश्चिम मिदनापुर में तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी दुश्मन है भाजपा और आरएसएस। पिछले कुछ वर्षों से विपक्ष के कमजोर होने से भाजपा ने जिले में घुसपैठ की है और वह आदिवासी लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। ‘जन जागरण मंच’ के संस्थापकों में से एक ने कहा कि हमारी पार्टी के नेताओं की कुछ गलतियों के कारण भाजपा और आएसएस यहां तक पहुंच गई है, लेकिन हमने उन गलतियों को सुधारा है।’

ममता को सता रहा सफाये का डर
लोकसभा चुनाव के पहले पांच चरणों में पश्चिम बंगाल में जो वोटिंग हुई है, उसमें भाजपा के पक्ष में जबरदस्त लहर देखने को मिली है। ममता के गुंडाराज पर पीएम नरेन्द्र मोदी का राष्ट्रवाद भारी पड़ रहा है। 2014 में राज्य की 42 में से 34 सीटें जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस को डर है कि कहीं उसकी सीटें 10 से भी कम न हो जाएं। इसी डर से ममता बनर्जी भाजपा को रोकने के लिए हरसंभव हथकंडा अपना रही हैं। माओवादियों के साथ गठजोड़ भी इसी का हिस्सा है।